प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कचनरवा में एक भी नर्स नही, बन्द रहता है केन्द्र ।

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महिलाओं के इलाज मे होती है दिक्कत, जनता में आक्रोश।

वीरेंद्र कुमार

विंढमगंज (सोनभद्र) । विकास खण्ड कोन के ग्राम पंचायत कचनरवा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कचनरवा महीनों से एनम विहीन हो गया है जिससे आदिवासी क्षेत्रों में टीकाकरण से लेकर गर्भवती महिलाओं का प्रसव आदि प्रभावित है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सूबे के मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री काफी संवेदनशील हैं पर विभागीय उपेक्षा कहें या स्थानीय लोगों की कमी जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रहा है । जिसका असर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जमीनी स्तर पर स्पस्ट दिखाई दे रहा है।

इसी क्रम में बताते चलें कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कचनरवा एनम विहीन विहीन होने के कारण इन आदिवासी क्षेत्र कचनरवा बागेसोती ,कुड़वा, बड़ाप् असनाबांध,किशनपुर वा, पीपरखाड़, केवाल , भालूकुदर, गीधिया आदि जगहों के लोगों को प्रसव या टीकाकरण कराने हेतु अन्यत्र जाना पड़ रहा है जो इन आदिवासी क्षेत्र के लोगों के लिए अभिशाप साबित हो रहा है।इस संबंध में जिला पंचायत सदस्य छविंद्र नाथ चेरो व भाजपा मंडल कोन कार्य समिति सदस्य शिवनारायण सिंह उराँव व वरिस्ट समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव ने संयुक्त रूप से बताया कि यह सिलसिला कई महीनों से चलता आ रहा है जिससे बच्चों का टीकाकरण व महिलाओं को प्रसव का प्रसव कराने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा जरूरत से ज्यादा जेब ढीला करना पड़ रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कचनरवा के चिकित्सक डॉक्टर एस0 के0 वर्मा ने बताया की सुनने में आया है की वह कहीं अन्यत्र चली गई है जिसकी जानकारी मेरे पास नहीं है और न ही मेरे पास किसी प्रकार की कोई लिखित सूचना दी गई है। उक्त के बावत् चोपन चिकत्सा अधीक्षक डॉक्टर फ़ैज़ अहमद ने बताया कि एनम संगीता से वार्ता की गई थी जिसके क्रम में उनके द्वारा कार्य न करने की असमर्थता जताई गई थी जिससे संबंधित मेरे द्वारा पत्र जारी करते हुए संबंधित विभाग को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही कोई न कोई ब्यवस्था की जायेगी।फिलहाल एनम द्वारा स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। उपरोक्त के संबंध में सूबे के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव गौंड ने सीएमओ से वार्ता कर कार्यवाही कराने का आश्वासन दिया।वहीँ इस संबंध में भाजपा बूथ अध्यक्ष कैलास राम भारती व जोखन प्रसाद यादव, जगदीश प्रसाद,  प्रदीप कुमार, रघुवर, राजेंद्र आदि स्थानीय लोगों ने सूबे के मंत्री व संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग किया है कि यह व्यवस्था व संबंधित एनम को निष्कासित कराना सुनिश्चित की जाए।

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