रेलकर्मियों की हुंकार: OPS से निजीकरण तक गूंजी 13 बड़ी मांगें, चोपन में AIGC महाधिवेशन में एकजुट हुए ट्रेन मैनेजर

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अमित मिश्रा

O- पुरानी पेंशन बहाल करने, निजीकरण रोकने और रिक्त पदों पर भर्ती की उठी मांग; कर्मचारियों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

चोपन (सोनभद्र) । रेलवे कर्मचारियों की लंबित मांगों और सेवा संबंधी मुद्दों को लेकर रविवार को सोनभद्र के चोपन में ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल (AIGC) के धनबाद मंडल का 22वां द्विवार्षिक महाधिवेशन आयोजित किया गया। अग्रवाल धर्मशाला में हुए इस सम्मेलन में चोपन, सिंगरौली, रेणुकूट और शक्तिनगर शाखाओं के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में ट्रेन मैनेजरों ने भाग लेकर संगठन की एकजुटता का प्रदर्शन किया।

महाधिवेशन में रेलवे कर्मचारियों के हितों से जुड़ी 13 प्रमुख मांगों को सरकार और रेलवे प्रशासन के समक्ष जोरदार तरीके से उठाया गया। सम्मेलन में सबसे प्रमुख मांग नई पेंशन योजना (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की रही। इसके साथ ही रेलवे के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन के नेताओं ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों के अधिकारों और सुविधाओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो संगठन भविष्य में व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगा।

महाधिवेशन में ड्रेस अलाउंस में वृद्धि, सभी ट्रेन मैनेजरों को एमएसीपी का लाभ, नौ घंटे से अधिक ड्यूटी पर रोक, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, रनिंग अलाउंस में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी, समय पर विश्राम एवं साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करने, ट्रेन मैनेजर का एंट्री लेवल पे-लेवल 6 करने तथा स्टेशन खंड में हैंड ब्रेक बांधने की बाध्यता समाप्त करने जैसी मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इसके अलावा मजदूर विरोधी बताए जा रहे लेबर कोड को वापस लेने, ट्रेन मैनेजरों को निर्धारित प्रिपरेटरी रेस्ट देने तथा ट्रेन मैनेजरों के लिए 30 प्रतिशत पद आरक्षित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

कार्यक्रम के दौरान संगठन के केंद्रीय, जोनल एवं मंडलीय पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को संगठन की मजबूती बनाए रखने और अपने अधिकारों की लड़ाई को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। सम्मेलन में विभिन्न शाखाओं के पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया तथा भविष्य की रणनीति पर भी विचार-विमर्श हुआ।

महाधिवेशन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि रेलवे कर्मचारियों के हितों, सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन का संघर्ष आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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