नौगढ़ (चंदौली)। सावन के मौसम में राजदरी–देवदरी जलप्रपात पर उमड़ रही पर्यटकों की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और कड़ा कर दिया है। अब जलप्रपात की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। बिना पहचान पत्र के आने वाले लोगों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

थाना प्रभारी रमेश यादव ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजदरी–देवदरी मार्ग पर छह स्थानों पर विशेष चेकिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण जलेबिया मोड़ पर चढ़ाई शुरू होते ही हर वाहन और पर्यटक की जांच की जा रही है। इसके अलावा सोनभद्र सीमा के निकट ब्रह्मपुल, कोईलरवां हनुमान मंदिर, नौगढ़ बांध मोड़ तथा जयमोहनी पोस्ता गहिला बाबा मार्ग पर भी पुलिस की विशेष निगरानी तैनात की गई है।
पुलिस प्रत्येक पर्यटक का फोटो लेकर आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र के माध्यम से सत्यापन कर रही है। जिन लोगों के पास पहचान पत्र नहीं है, उन्हें मौके से वापस लौटाया जा रहा है। महिला पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सादी वर्दी में महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई है, जो पूरे क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि झरनों के आसपास शराब पीना, प्लास्टिक या अन्य कचरा फैलाना, तेज आवाज में संगीत बजाना, हुड़दंग करना अथवा किसी भी प्रकार की अशोभनीय गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान कई युवकों को चेतावनी देकर वापस भी भेजा गया है।
पुलिस क्षेत्राधिकारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि यह अभियान केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि राजदरी–देवदरी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से भी चलाया जा रहा है। बीते वर्षों में बढ़ते प्लास्टिक कचरे, अनियंत्रित भीड़ और असामाजिक गतिविधियों से प्राकृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचा है, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाए गए हैं।
थाना प्रभारी रमेश यादव ने पर्यटकों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान अपना आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र साथ रखें, निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें, स्वच्छता बनाए रखें और प्राकृतिक वातावरण का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि “राजदरी–देवदरी घूमने जरूर आइए, लेकिन अनुशासन और कानून का पालन करते हुए। प्रकृति का आनंद लें, उसे नुकसान न पहुंचाएं।”






