सह-खाताधारकों के चलते ठप पड़ा पौराणिक गौरीशंकर मंदिर का विकास, ग्राम प्रधान ने डीएम से लगाई गुहार

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अमित मिश्रा

O- धार्मिक धरोहर पर प्रशासनिक बेड़ियां!

O- पर्यटन विभाग की स्वीकृत योजनाएं अटकीं, भूमि विवाद के कारण कई बार लौट चुकी विकास की धनराशि

O- सभी सह-खाताधारकों की सहमति के बावजूद अलग खाता नहीं बनने से संकट बरकरार।

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)।  सरकार जहां धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास को प्राथमिकता दे रही है, वहीं सोनभद्र जनपद का ऐतिहासिक एवं पौराणिक गौरीशंकर महादेव मंदिर आज भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझा हुआ है। मंदिर परिसर की भूमि पर सह-खाताधारकों के नाम दर्ज होने के कारण सुंदरीकरण, पर्यटन विकास और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य वर्षों से प्रभावित हो रहे हैं।

मामले को लेकर ग्राम पंचायत बरदहा (गौरीशंकर) की ग्राम प्रधान मीना देवी ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मौजा बरदहा की आराजी संख्या-121 में स्थित इस प्राचीन मंदिर की भूमि पर कई सह-खाताधारकों के नाम दर्ज हैं। यही स्थिति विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।

ग्राम प्रधान के अनुसार गौरीशंकर मंदिर न केवल सोनभद्र बल्कि आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह स्थल धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बावजूद इसके, भूमि संबंधी तकनीकी विवादों के कारण पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत विकास योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं और कई बार स्वीकृत धनराशि तक वापस चली जाती है।

शिकायती पत्र में बताया गया है कि आराजी संख्या-121 का कुल रकबा 1.012 हेक्टेयर है, जिसमें से 0.443 हेक्टेयर क्षेत्र को चकबंदी विभाग पहले ही चक बाहर घोषित कर चुका है। इसके बावजूद मंदिर परिसर पर सभी खातेदारों के नाम दर्ज रहने से भविष्य में स्वामित्व विवाद की आशंका बनी हुई है।

ग्राम प्रधान ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मंदिर परिसर की भूमि को अलग खाता बनाकर केवल गौरीशंकर मंदिर के नाम सुरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति उस पर निजी अधिकार का दावा न कर सके और सरकार की धार्मिक एवं पर्यटन विकास योजनाएं बिना किसी कानूनी अड़चन के धरातल पर उतर सकें।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राम प्रधान के अनुसार इस प्रस्ताव पर सभी सह-खाताधारकों ने अपनी सहमति भी दे दी है। इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी न होने से मंदिर का समुचित विकास रुका हुआ है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि प्रशासन शीघ्र निर्णय लेता है तो गौरीशंकर महादेव मंदिर धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।

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