करोड़ों के नाला निर्माण पर सवाल, चंद मिनट की बारिश ने खोली नगर पालिका के जल निकासी की पोल

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अमित मिश्रा

O- व्यापार संगठन का आरोप,13 किमी नाला निर्माण के बावजूद घरों और बाजारों में घुसा पानी, डीपीआर से लेकर निर्माण गुणवत्ता तक की तकनीकी जांच की मांग

सोनभद्र । जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में करीब 36 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए नाला निर्माण कार्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन सोनभद्र ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद 16 अगस्त की रात महज करीब 40 मिनट की बारिश में नगर के कई हिस्से जलमग्न हो गए और लोगों के घरों तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने पानी भर गया। संगठन ने नाला निर्माण की डीपीआर, डिजाइन, क्षमता और निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन की आवश्यक बैठक राजेश जायसवाल के आवास पर हुई। बैठक में नगर की जल निकासी समेत विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि नाला निर्माण का मूल उद्देश्य नगर को जलभराव की समस्या से राहत दिलाना था, लेकिन भारी बारिश के दौरान सामने आई स्थिति ने परियोजना की उपयोगिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

40 मिनट की बारिश में बिगड़े हालात

जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा ने कहा कि जनपद मुख्यालय पर लगभग 36 करोड़ रुपये की लागत से करीब 13 किलोमीटर नाला निर्माण कराया गया है। इसके बावजूद 16 अगस्त की रात हुई बारिश में नगर के अनेक हिस्सों में पानी भर गया। कई गलियों में जलभराव के साथ घरों और दुकानों के आसपास पानी जमा हो गया, जिससे आम नागरिकों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि यदि सामान्य अवधि की बारिश का पानी भी व्यवस्थित तरीके से नहीं निकल पा रहा है तो करोड़ों रुपये की नाला परियोजना की वास्तविक उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। संगठन ने इसे सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और परियोजना की योजना पर गंभीरता से विचार करने का विषय बताया।

नई सड़क भी जल निकासी के अभाव में होने लगी खराब

व्यापार संगठन का कहना है कि नगर में हाल ही में सड़क का निर्माण कराया गया है, लेकिन पानी की समुचित निकासी नहीं होने के कारण सड़क कई स्थानों पर खराब होने लगी है और गड्ढे बनने लगे हैं। संगठन के मुताबिक, यदि जल निकासी की व्यवस्था प्रभावी नहीं हुई तो नए निर्माण पर खर्च हुआ पैसा भी प्रभावित हो सकता है।

2025 में सौंपा गया था ज्ञापन

कौशल शर्मा ने कहा कि यह परियोजना वर्ष 2020 की बताई गई थी, जबकि नाला निर्माण का काम जून 2025 में शुरू किया गया। संगठन ने 4 जुलाई 2025 को सीएनडीएस के सहायक अभियंता को ज्ञापन सौंपकर नाला निर्माण की डीपीआर को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। संगठन का दावा है कि इसके बावजूद शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद जनपद भ्रमण पर आए पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष को भी ज्ञापन देकर परियोजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं से अवगत कराया गया था।

डीपीआर और निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच की मांग

व्यापार संगठन ने संबंधित विभाग से मांग की है कि नाला निर्माण की डीपीआर और तकनीकी स्वीकृति की समीक्षा, निर्माण कार्य की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच तथा नाले की वास्तविक जल निकासी क्षमता का स्थलीय परीक्षण कराया जाए।

संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि परियोजना तैयार करने से पहले क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, संभावित वर्षा जल की मात्रा और प्राकृतिक जल निकासी के पुराने मार्गों का पर्याप्त तकनीकी अध्ययन किया गया था या नहीं।

“विकास की सार्थकता परिणाम से तय होती है”

जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा ने कहा कि विकास की सार्थकता केवल परियोजना की लागत से नहीं, बल्कि उसके जमीनी परिणाम से तय होती है। उनका कहना है कि बारिश के कुछ ही समय में सड़कें और बाजार जलमग्न हो जाएं तथा व्यापारियों और नागरिकों को आवागमन में परेशानी हो, तो यह केवल जलभराव की समस्या नहीं बल्कि नगर नियोजन और ड्रेनेज व्यवस्था में कमी का संकेत है।

उन्होंने कहा कि सोनभद्र मुख्यालय को जलभराव मुक्त और व्यवस्थित नगर बनाने के लिए अलग-अलग हिस्सों में टुकड़ों में निर्माण कराने के बजाय समग्र एवं वैज्ञानिक ड्रेनेज प्लान तैयार किया जाना चाहिए, जिससे सार्वजनिक धन का प्रभावी उपयोग हो और भविष्य में नागरिकों एवं व्यापारियों को परेशानी न उठानी पड़े।

बैठक में प्रितपाल सिंह, राजेश जायसवाल, जसकीरत सिंह, प्रशांत जैन, राजू जायसवाल, शरद जायसवाल, सिद्धार्थ सांवरिया, सूर्या जायसवाल, अभिषेक साहू, अभिषेक केसरी, गुरप्रीत सिंह, दीप सिंह पटेल, नागेंद्र मोदनवाल, पंकज कनोडिया, प्रदीप जायसवाल, अमित अग्रवाल, टीपू अली और यशपाल सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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