सी एस पाण्डेय
बभनी (सोनभद्र) । केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल’ योजना के क्रियान्वयन के बीच सोनभद्र के बभनी विकास खंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। असनहर गांव का एक श्रमिक पिछले चार वर्षों से अपनी मेहनत की मजदूरी पाने के लिए भटक रहा है, जबकि कंपनी का लाखों रुपये का सामान आज भी उसके घर पर पड़ा हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, असनहर निवासी कमलेश कुमार वर्ष 2024 में जीबीपीआर कंपनी के तहत ‘हर घर नल’ योजना में कार्यरत थे। शुरुआत में उन्हें दो माह का भुगतान मिला, लेकिन उसके बाद से उनका पारिश्रमिक रोक दिया गया। तब से लेकर अब तक श्रमिक लगातार भुगतान के लिए अधिकारियों और ठेकेदारों के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
कमलेश कुमार का कहना है कि कंपनी का काफी मूल्यवान सामान आज भी उनके घर पर रखा हुआ है, जिसकी वे वर्षों से रखवाली कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें उनका बकाया भुगतान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला।
मामले में एक और गंभीर पहलू यह सामने आया है कि विभागीय रिकॉर्ड में श्रमिक के कार्य का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिल रहा है, जबकि काम कराने वाला ठेकेदार कथित रूप से फरार बताया जा रहा है। इससे श्रमिक की स्थिति और भी जटिल हो गई है।
पीड़ित श्रमिक ने अब जिलाधिकारी से प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की है। इसके साथ ही श्रम आयुक्त को भी पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
वहीं, परियोजना प्रबंधक प्रहलाद कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है और वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
यह प्रकरण न केवल श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की भी पड़ताल करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो इससे योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।






