अमित मिश्रा
सोनभद्र। स्थानीय श्री राम जानकी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन से पधारे परम पूज्य आचार्य मनोहर कृष्ण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया। कथा स्थल भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा, जहां श्रद्धालु भगवान की लीलाओं में भावविभोर हो उठे।
आचार्य महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में असुरों का संहार केवल लीला रूप में किया। पूतना जैसे राक्षसी स्वरूप में आई स्त्री ने जब बालकृष्ण को विष पिलाने का प्रयास किया, तब प्रभु ने उसे मुक्ति प्रदान की। उन्होंने कहा कि जिस गति की पात्र माता देवकी थीं, वही गति श्रीकृष्ण ने पूतना को दी, जो उनके परम दयालु स्वरूप को दर्शाता है।
कथा में बताया गया कि अघासुर, बकासुर और ढेंकासुर जैसे राक्षसों का भी उद्धार भगवान ने बालपन की खेल-खेल में ही कर दिया। आचार्य मनोहर कृष्ण महाराज ने श्रीकृष्ण की ब्रज लीलाओं — माखन चोरी लीला, गोचारण लीला और महारास लीला — का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि माखन चोरी लीला का मूल उद्देश्य ब्रज गोपियों की भक्ति को स्वीकार करना था। गोपियां यह सोचती थीं कि क्या भगवान केवल यशोदा मैया के माखन का ही भोग लगाएंगे? भगवान ने उनकी भावनाओं को समझते हुए उनके घर-घर जाकर माखन चुराया और उनकी भक्ति को स्वीकार किया।
गोचारण लीला के संदर्भ में आचार्य महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण ने गौ सेवा के माध्यम से सम्पूर्ण देवताओं की सेवा की। उन्होंने बताया कि “गावो विष्णुः स्मृताः” — गाय के प्रत्येक रोम में देवी-देवताओं का वास होता है। गोबर में लक्ष्मी और गोमूत्र में गंगा का निवास बताया गया है।
कथा के अंतर्गत कालिया नाग मर्दन, गिर्राज पूजन और 56 भोग दर्शन का भी सुंदर वर्णन किया गया। आयोजन में मुरलीधर शुक्ला, ओमप्रकाश पाठक, महेंद्र प्रसाद शुक्ला, अजीत शुक्ला, आशुतोष पाठक, प्रदीप चौरसिया, नीतेश सिंह, प्रेमकांत, कृपा नारायण मिश्रा, जयप्रकाश गुप्ता एवं बबलू शुक्ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।







