राम वनवास की लीला का मंचन देख दर्शकों की भर आई आंखें

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अमित मिश्रा

कैकेयी के वरदान और दशरथ के विलाप ने किया भावुक, बारिश के बावजूद रामलीला मैदान रहा खचाखच भरा

सोनभद्र। नगर के रामलीला मैदान में चल रहे रामलीला महोत्सव के छठवें दिन शुक्रवार को भगवान राम के वनवास की भावनात्मक लीला का मंचन किया गया। मंचन के दौरान महाराज दशरथ के पुत्र वियोग में विलाप का दृश्य इतना मार्मिक रहा कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

प्रयागराज से आए सुप्रसिद्ध कलाकारों ने लीला का सजीव चित्रण किया। प्रारंभिक दृश्य में महाराज दशरथ द्वारा राम का राज्याभिषेक करने का निश्चय और मंत्री सुमंत को आदेश देने का प्रसंग दिखाया गया। इसके बाद मंथरा के बहकावे में आई महारानी कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांग लिए—भरत को राजगद्दी और राम को 14 वर्ष का वनवास।

रघुवंशी मर्यादा के चलते दशरथ ने वचन निभाने का निर्णय किया। जैसे ही राम को वनवास की आज्ञा मिली, वे तुरंत तैयार हो गए। वन गमन की सूचना पाकर महाराज दशरथ व्याकुल होकर रो पड़े और अयोध्या नगरी में शोक छा गया। इस दौरान सीता और लक्ष्मण ने भी भगवान राम का साथ देने का संकल्प लिया। राम के साथ हजारों नर-नारी वन गमन को तत्पर दिखाए गए। आगे के दृश्य में भगवान राम का तमसा नदी के किनारे रात्रि विश्राम का प्रसंग मंचित किया गया।

बारिश के बावजूद रामलीला प्रांगण में भारी भीड़ उमड़ी रही। दर्शकों ने भावविभोर होकर कलाकारों की अदाकारी का आनंद लिया।

कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष पवन कुमार जैन, राकेश गुप्ता, प्रमोद गुप्ता, आनंद मिश्रा, विमल अग्रवाल, विजय कनोडिया, सुमन केसरी, चंदन केसरी, उमेश केसरी, प्रशांत जैन समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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