अमित मिश्रा
O-“क्या कंपनी के दबाव में है प्रशासन?” सोनभद्र में वनाधिकार पट्टों पर आदिवासियों का प्रदर्शन
O- सैकड़ों आदिवासी परिवारों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जताया विरोध, गूंजा नारा – “जान देंगे, जमीन नहीं देंगे”
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। सोनभद्र जिले में वनाधिकार पट्टाधारकों को कथित रूप से जारी किए गए नोटिसों के विरोध में शुक्रवार को ससनई क्षेत्र से पहुंचे सैकड़ों आदिवासी एवं वनवासी परिवारों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन के दौरान किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत जिन परिवारों को कानूनी रूप से भूमि का अधिकार दिया गया था, अब उन्हीं को प्रस्तावित कंपनी परियोजना के नाम पर नोटिस भेजे जा रहे हैं।
संदीप मिश्रा ने कहा, “यदि प्रशासन जनता के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय किसी कंपनी के हित में फैसले लेता दिखाई देता है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। आदिवासियों और वनवासियों की जमीन छीनने का हर प्रयास लोकतांत्रिक तरीके से रोका जाएगा। जल, जंगल और जमीन पर किसी भी तरह का जबरन कब्जा स्वीकार नहीं होगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि “वनाधिकार कानून से मिले अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। यदि पट्टाधारकों को बेदखल करने का प्रयास किया गया तो गांव-गांव से बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।”
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण कन्हैयालाल चेरो ने कहा, “हम अपनी पट्टे की जमीन किसी भी कीमत पर कंपनी को नहीं देंगे। जान चली जाए तो भी जमीन नहीं छोड़ेंगे।” वहीं ज्ञानमती देवी ने कहा कि “हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे। नोटिसों से डरने वाले नहीं हैं।”
संदीप मिश्रा ने कहा कि संघर्ष मोर्चा वर्षों से “पेड़ है तो प्राण है” अभियान के माध्यम से जंगल, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की रक्षा की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वनाधिकार पट्टाधारकों के अधिकारों का हनन हुआ तो आंदोलन को जिला ही नहीं, प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।
प्रदर्शन में कन्हैया चेरो, विजय चेरो, ज्ञानमती, राजेश चेरो, दिनेश चेरो, विन्दू खरवार, मुखलाल चेरो, उमाशंकर यादव, राजू पासवान सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
(स्पष्टीकरण: समाचार में प्रशासन पर लगाए गए सभी आरोप किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा और प्रदर्शनकारियों के बयानों पर आधारित हैं। जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)






