इंटक ने की गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई और श्रम संहिता वापस लेने की मांग, हरदेवनारायण तिवारी बोले- समाधान नहीं हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन
सोनभद्र। उत्तरी और मध्य भारत में चल रहे श्रमिक आंदोलन के समर्थन में 12 मई को राष्ट्रीय मांग दिवस के रूप में उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों के श्रमिकों द्वारा निर्णय लिया गया है। मंगलवार को जिलाधिकारी सोनभद्र के कार्यालय पर प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल राजभवन लखनऊ को ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों द्वारा नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में श्रमिक आंदोलन पर किए जा रहे क्रूर दमन की निंदा की जाती है। यह निर्दोष श्रमिकों और आम लोगों पर सीधा हमला है, जिससे राज्य तंत्र श्रमिकों के अधिकारों को कुचल कर कॉर्पोरेट हितों के पक्ष में काम कर रहा है। अब तक 1000 से अधिक श्रमिकों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा अभी भी श्रमिकों के आवासों पर छापा मारा जा रहा है। श्रमिकों के वास्तविक समस्या के समाधान के बजाय उन्हें बाहरी या राष्ट्र विरोधी बताकर उनके संघर्ष को खत्म करने के लिए दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। ऐसी कार्रवाई से औद्योगिक शांति संभव नहीं हो सकती। श्रमिकों के लंबे समय से चली आ रही मांगों को मनवाने के लिए राष्ट्रीय मांग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय सभी ट्रेड यूनियन ने लिया है। प्रदर्शन में प्रमुख रूप से इंटक उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव उत्तम कुमार मिश्रा, इंटक के जिला उपाध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष बृजेश तिवारी, इंटक के जिला महासचिव शमीम अख्तर खान, ऋतुराज पाठक, मुन्ना खान, दिलीप कुमार सिंह, हरिशंकर गौड़, राजाराम भारती, शंकर, लालता चौहान, मुकेश चेरो, फुलवंती देवी, कुंती देवी, रामप्रसाद, चंदर, हरिलाल, राम नारायण, मोहरलाल, गुलाब आदि रहे। इंटक के जिला अध्यक्ष हरदेवनारायण तिवारी ने कहा कि समस्याएं जो लंबे समय से चली आ रही हैं, उनका समाधान किया जाना अति आवश्यक है। सभी गिरफ्तार श्रमिकों और कर्मचारियों को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए, सभी झूठे मामले वापस लिए जाएं और हिरासत का अंत किया जाए। श्रमिक विरोधी श्रम संहिता को वापस लिया जाए, सभी ट्रेड यूनियन के साथ तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता और भारतीय श्रम सम्मेलन का सरकार द्वारा आयोजन किया जाए। औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रहे मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रतिमाह जीने लायक दी जाए। डाला सीमेंट फैक्ट्री मेसर्स अल्ट्राटेक में काम करने वाले सभी नियमित कर्मचारियों को सीमेंट वेज बोर्ड दिया जाए। पूर्व राजकीय सीमेंट फैक्ट्री डाला, चुर्क, चुनार में काम करने वाले नियमित कर्मचारियों को सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार सभी कर्मचारियों को वेतन, पेंशन, सेवा योजना एवं निर्णय के अनुसार अन्य हितकारी लाभ प्रदान किए जाएं। श्रमिकों को 8 घंटे कार्य दिवस, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और वैधानिक लाभ सुनिश्चित किए जाएं।संविदा श्रमिकों के लिए समान वेतन और लाभ, स्थाई नौकरियों में संविदा प्रणाली का नियमितीकरण करके उन्मूलन किया जाए। श्रमिकों को सस्ती एलपीजी और आवश्यक वस्तुओं के कीमत पर नियंत्रण किया जाए तथा वाणिज्यिक संस्थान में काम करने वाले मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, नियुक्ति पत्र, परिचय पत्र, साप्ताहिक अवकाश एवं अन्य वैधानिक सुविधा प्रदान कराई जाए। इन मांगों को लेकर जिला मुख्यालय सोनभद्र पर यह प्रदर्शन किया जा रहा है। यदि समस्याओं का निस्तारण नहीं किया गया तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन करने के लिए संगठन बाध्य होगा। बृजेश तिवारी एवं उत्तम कुमार मिश्रा ने कहा कि वर्तमान सरकार मजदूरों की बातों को नहीं सुन रही है, उल्टे मजदूरों की मांगों पर उन्हें जेल के हवालात में बंद किया जा रहा है। सरकार ऐसे गरीब मजदूरों के साथ न्याय करे और अपनी हठधर्मिता का रवैया त्यागे, नहीं तो श्रमिक वर्ग अपने मांगों के समर्थन में नोएडा, ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर आंदोलन कर बैठेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी। उत्तर प्रदेश सरकार से अपील है कि मजदूर प्रतिनिधियों से बैठकर वार्ता कर समस्याओं का निस्तारण करे।






