अमित मिश्रा
पीड़ित किसान ने जिलाधिकारी से लगाया न्याय की गुहार
एसडीएम ने चार सदस्यी टीम गठित कर कराया नापी, नही मान रहे कम्पनी के अधिकारी
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। आदिवासी बाहुल्य जनपद में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना होने के बाद जमीन विवाद सुलझने के बजाय उलझते ही जा रहे है। जनपद के ओबरा और दुद्धी तहसील क्षेत्र में बिजली परियोजना , एल्मुनियम फैक्ट्री , सीमेन्ट प्लान्ट और क्रशर प्लांट स्थापित हुआ है। इन सबकी स्थापना के लिए सरकारी , वन या फिर आदिवासी किसानो की जमीन ली गयी है। इन जमीनों पर कम्पनियों के विस्तार से जमीन विवाद बढ़ने लगा है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां किसान की जमीन एक निजी सीमेंट कम्पनी पर कब्जे का आरोप लगा है। ओबरा तहसील क्षेत्र के डाला में एक किसान की लगभग दो बीघे जमीन पर कथित तौर पर अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड ने कब्जा कर लिया और वहां गाड़ियों का पार्किंग यार्ड बना दिया। किसान ने न्याय की गुहार लगाता रहा, लेकिन प्रशासनिक जांच टीम भी कंपनी के दबाव में चुप्पी साधे रही। सवाल ये है कि जब किसान की जमीन ही सुरक्षित नहीं है, तो इंसाफ की उम्मीद आखिर कहां से करेगा किसान।
ओबरा तहसील के डाला निवासी किसान अरुण प्रकाश पाठक की सड़क किनारे की करीब 2 बीघे उपजाऊ जमीन पर कथित रूप से निजी सीमेंट कम्पनी पर कब्जा करने का आरोप लगाया है।
किसान का आरोप है कि कंपनी ने उनकी जमीन पर जबरन गाड़ियों का पार्किंग यार्ड बना दिया। किसान ने इसकी शिकायत लेखपाल, कानूनगो और एसडीएम ओबरा से कई बार की , यहां तक कि एसडीएम ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम भी गठित की। एसडीएम द्वारा गठित चार सदस्यी टीम मौके पर पहुंची तो नापी करने के बजाय कंपनी के दबाव में आकर चुपचाप वापस हो गई। नतीजा ये हुआ कि न तो ज़मीन का सीमांकन हुआ और न ही कोई ठोस कार्रवाई।
अब किसान दर-दर भटक रहा है न्याय की गुहार लगाता हुआ जिला अधिकारी के कार्यालय तक पहुंचा है। पीड़ित का साफ कहना है कि जब तक उसकी जमीन वापस नहीं दिलाई जाएगी, तब तक लड़ाई जारी रहेगी।
वहीं इसे लेकर पीड़ित किसान अरुण प्रकाश पाठक ने आरोप बताया कि मेरी पुश्तैनी ज़मीन पर जबरन कब्ज़ा कर लिया गया है। मैंने अधिकारियों से बार-बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई की जगह सब चुप हो गए। मुझे बस मेरी ज़मीन वापस चाहिए।
बोले एसडीएम:- इस मामले पर विवेक कुमार सिंह एसडीएम ने कहा कि निजी सीमेंट कम्पनी और किसान के बीच लगभग दो बीघा जमीन को लेकर विवाद है। जिसके किये टीम गठित करके नापी करायी गयी है जल्द ही नक्शे में स्थान चिन्हित करके किसान की जमीन को अलग कर दिया जाएगा।






