अमित मिश्रा
सोनभद्र । एक ओर जहां उत्तर प्रदेश सरकार पेयजल संकट से निपटने के लिए “हर घर नल-जल योजना” और “जल जीवन मिशन” जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है, वहीं नगवां ब्लॉक के कई ग्राम पंचायतों में इन योजनाओं की आड़ में करोड़ों की सरकारी धनराशि को पानी की तरह बहाया जा रहा है।
ब्लॉक के ग्राम पंचायतों में टैंकर परिचालन के नाम पर पिछले चार महीनों में लाखों रुपये का फर्जी भुगतान किया गया है, जबकि अधिकतर गांवों में पहले से ही नल जल योजना लागू है और बारिश की वजह से जलस्रोत पर्याप्त हैं। जमीनी हकीकत जाने बिना पंचायत सचिव और ग्राम प्रधानों ने कागजों में टैंकर घुमाकर शासन को जबरदस्त चूना लगाया है।
कागजों में चल रहे टैंकर, जमीन पर नदारद
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरईगढ़, बनबहुआ, गोटी बांध, नंदना सिकरवार जैसे ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत नल से जल की व्यवस्था पहले से ही प्रभावी है। इसके बावजूद इन गांवों में टैंकर परिचालन दर्शाया गया और प्रत्येक महीने हजारों-लाखों रुपये भुगतान कर दिए गए।
14 जुलाई को पंचायत सचिवों द्वारा किए गए भुगतान में टैंकर परिचालन के साथ-साथ “डिक्शनरी रिबोरिंग” और “मरम्मत” जैसे फर्जी कार्यों का उल्लेख कर एक ही बिल पर बड़ी धनराशि निकाल ली गई, जो वित्तीय नियमों और सरकारी नैतिकता दोनों का सीधा उल्लंघन है।
बीडीओ और एडीओ पंचायत की रहस्यमयी चुप्पी
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब नगवां के ब्लॉक कार्यालय के अधिकारियों की आंखों के सामने होता रहा, लेकिन बीडीओ और एडीओ पंचायत ने कभी गांवों का निरीक्षण कर हकीकत जानने की कोशिश नहीं की।
ब्लॉक कार्यालय में बैठे अधिकारियों की चुप्पी को ग्रामीण मिलीभगत मान रहे हैं। यदि इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी इन अधिकारियों की जानकारी में नहीं थी, तो यह लापरवाही है — और अगर जानकारी होते हुए भी आंखें मूंदी गईं, तो यह भ्रष्टाचार की सीधी संलिप्तता है।
एक-दूसरे पर डाल रहे दोष, नहीं कोई जवाबदेही
इस पूरे मामले पर पंचायत सचिव राकेश द्विवेदी से पूछे जाने पर उन्होंने सारा दोष तत्कालीन एडीओ पंचायत और पूर्व सचिवों पर मढ़ दिया। उन्होंने कहा कि यह भुगतान उस समय की प्रक्रियाओं के तहत हुआ है, जिसमें उनकी भूमिका नहीं रही।
ऐसे में यह स्पष्ट है कि ब्लॉक स्तर पर भ्रष्टाचार की एक परिपाटी बन चुकी है — जहां गड़बड़ी सामने आने पर कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता और पूरा तंत्र एक-दूसरे पर दोषारोपण में व्यस्त हो जाता है।
14वें और 15वें वित्त आयोग की हो जांच – ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ टैंकर परिचालन ही नहीं, बल्कि पंचायतों में प्रशासनिक मद, मरम्मत कार्य और वित्त आयोग की अन्य योजनाओं में भी भारी गड़बड़ी की आशंका है। लोगों ने जिलाधिकारी सोनभद्र से मांग की है कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत हुए सभी भुगतानों की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पंचायत सचिवों, ग्राम प्रधानों व अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
क्या होगी कार्रवाई, या फिर घोटाले पर पड़ेगा मिट्टी डाल?
अब सवाल यह है कि क्या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा या प्रशासन इस घोटाले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों को बेनकाब करेगा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बार-बार दोहराई जा रही “जीरो टॉलरेंस” की नीति की असल परीक्षा अब होगी।
बिलकुल, नीचे दो प्रभावशाली बॉक्स आइटम दिए जा रहे हैं जिन्हें समाचार के साइड कॉलम में रखा जा सकता है, जैसे आपने सुझाया:
इन गांवों में हुआ टैंकर घोटाला
(जहां हर घर नल जल योजना लागू होने के बावजूद टैंकर परिचालन दिखाकर किया गया लाखों का भुगतान)
सरईगढ़, बनबहुआ, गोटी बांध, नंदना सिकरवार, अन्य कई पंचायतें भी संदेह के घेरे में
O- इन सभी गांवों में बरसात के कारण जलस्रोत भरपूर थे
O- फिर भी पंचायत सचिवों ने कागजी टैंकर चलाकर किया बजट का दुरुपयोग
क्या कहते हैं ग्रामीण?
“गांव में हर घर में नल से पानी आ रहा है, फिर भी टैंकर का भुगतान समझ से बाहर है। ये सीधा पैसा हजम करने का मामला है।”
– धीरेंद्र सिंह, ग्रामीण – सरईगढ़
“कभी कोई टैंकर गांव में नहीं आया, लेकिन कागजों में हर महीने दो-दो टैंकर दिखाया गया। इसकी जांच होनी चाहिए।”
– शांति देवी, महिला समूह सदस्य – गोटी बांध
“जिम्मेदार लोग फर्जी बिलों के सहारे सरकार को चूना लगा रहे हैं। डीएम साहब को खुद जांच करनी चाहिए।”
– संजय कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता – नगवां







