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वाहन स्वामित्व हस्तांतरण में फर्जीवाड़े का आरोप: परिवहन आयुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग, अल्ताफ कादरी बोले– ‘दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई’

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अमित मिश्रा

सोनभद्र (उत्तरप्रदेश)। जनपद में एक वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण को लेकर कथित अनियमितताओं और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। वाहन संख्या UP64AM9971 के स्वामित्व हस्तांतरण में कथित कूटरचित दस्तावेजों, विभागीय लापरवाही और मिलीभगत के आरोप लगाते हुए रॉबर्ट्सगंज निवासी अल्ताफ अहमद कादरी ने परिवहन आयुक्त एवं प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मूल वाहन स्वामी के कथित शपथपत्र, बैंक अभिलेखों तथा अन्य उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह मामला गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत करता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि मूल वाहन स्वामी ने कथित रूप से शपथपत्र देकर कहा है कि उन्होंने किसी भी हस्तांतरण प्रपत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए और न ही संबंधित कार्यालय में उपस्थित हुए।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिक्री से संबंधित दस्तावेजों के अनुसार बैंक ऋण समाप्त होने के बाद ही Loan Closure Letter, NOC तथा अन्य हस्तांतरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जानी थीं। इसके बावजूद वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित मामले में विभागीय स्तर पर शिकायत का निस्तारण तो कर दिया गया, लेकिन कथित फर्जी दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच, संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका तथा डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच नहीं कराई गई।

अल्ताफ कादरी का बयान

शिकायतकर्ता अल्ताफ अहमद कादरी ने कहा,

“यह मामला केवल एक वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण का नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता, दस्तावेजों की सत्यता और विभागीय जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड बदले गए हैं तो दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ निष्पक्ष जांच और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। मुझे न्यायपालिका और शासन की निष्पक्ष जांच व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।”

शिकायत में प्रमुख मांगें

शिकायत में परिवहन आयुक्त से मांग की गई है कि-

  • पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  • Form-29, Form-30, Form-35, बैंक NOC, हस्ताक्षर एवं अन्य दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जाए।
  • VAHAN पोर्टल के डिजिटल लॉग और रिकॉर्ड सुरक्षित कर जांच में शामिल किए जाएं।
  • यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ध्यान दें: यह समाचार शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या अंतिम सत्यापन संबंधित जांच एवं सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही माना जाएगा। संबंधित विभाग का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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