म्योरपुर के गोविंदपुर में औषधीय वनस्पतियों का आकलन, दुर्लभ पौधों के संरक्षण और आजीविका की खुलेगी राह
म्योरपुर/सोनभद्र। सोनांचल के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों को अब नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है।
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की टीम ने सोमवार को म्योरपुर ब्लॉक के गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम परिसर और आसपास के जैव विविधता वाले जंगलों में औषधीय वनस्पतियों का अध्ययन किया। टीम में डॉ विक्रमा सिंह, अनिल द्विवेदी, अनुपमा देवी, दिव्यांश आदि शामिल रहे।
सोनभद्र का वनांचल जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां के जंगलों में अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनका आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से घरेलू उपचार में उपयोग करता आ रहा है। CSIR के इस अध्ययन से वनस्पतियों की वैज्ञानिक पहचान, औषधीय गुणों और संभावित उपयोगों को लेकर नई जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार औषधीय पौधों का संरक्षण स्थानीय लोगों की भागीदारी से किया जाना जरूरी है। इससे भविष्य में औषधीय पौधों की खेती, स्थानीय आजीविका और वन आधारित रोजगार की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं और क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।









