तीन दिवसीय विश्व हिन्दू परिषद की संस्कारशाला का हुआ शुभारम्भ

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राजन

मिर्जापुर। स्थानीय नगर के इमलाहनाथ मोहल्ले में स्थित विश्व हिंदू परिषद के जिला कार्यालय पर तीन दिवसी संस्कार शाला का आज से शुभारंभ हुआ।इस मौके पर यूपी उत्तराखंड के संयुक्त क्षेत्रीय सेवा प्रमुख राधेश्याम द्विवेदी ने कहा कि हर इंसान की प्रथम गुरु मां होती हैं। जब वही अपने संस्कारों को तिलांजलि देंगी तो फिर अपने बच्चों में संस्कार की आशा न करें। कहा कि जब बच्चे पहले रोते थे तब उन्हें मां या दादी लोरी सुनाती थी । बच्चों को सुलाने के लिए राजा-रानी देवी- देवताओं की कहानियां सुनाती थी।

आज जब बच्चा रोता है तब मां उस मोबाइल पकड़ा देती हैं । विद्यालय में जाने वाला अबोध बालक भी मोबाइल पर अंगुलिया नचाते हुए तरह-तरह के वीडियो कार्टून देखता रहता है । जब वह कार्टून देखेगा उसका जीवन भी संस्कार विहीन कार्टून की तरह होगा । इसके लिए कोई और नहीं बल्कि बदलते दौर में अपने जिम्मेदारी से भी विमुख होने वाली माँ है, जो मानव की प्रथम गुरु हैं ।

प्रशिक्षक सीमा सिंह ने बताया कि संसार से बच्चों को परिचित कराने वाली माँ की महिमा का बखान नहीं किया जा सकता।कहा कि बच्चों को संसार से परिचित करा कर उन्हें गुणवान बनाने वाले मां ही है। देवताओं की स्तुति के समय उनकी तुलना पहले माँ से की जाती थी। तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो…।

कहा कि मां की संस्कार विहीन शिक्षा का असर बालक के साथ ही पूरे परिवार और खानदान पर पड़ता है । भारतीय खान पान, संस्कार एवं संस्कृति वैज्ञानिक रहस्यों को समाहित किए हुए हैं।
जिसकी उपेक्षा से जीवन में सुख नहीं अपितु दुःखों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को संस्कार युक्त बनाना है तो सर्वप्रथम मां को अपने संस्कार अपनी परंपरा को याद करके उसके बीज का रोपण बच्चों में करना होगा । प्रशिक्षक सीमा । ने कहा कि बदलती दौर में महिलाओं के पास जिम्मेदारियां बढ़ी है लेकिन हम अपने संस्कारों को कैसे दरकिनार कर सकते हैं।

कार्यक्रम में अनिल सिंह, विजय कृष्ण सिंह, प्रांत सह सेवा प्रमुख, अमित पाठक, विभाग संगठन मंत्री, देव प्रकाश पाठक प्रवीण मौर्य, पूनम केशरी, मंजू लता, श्रीकृष्ण सिंह पटेल, डा. पुष्पेंद्र पूजा, संगीता, विमला, श्रद्धा आदि प्रमुख रुप से उपस्थित रही।

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