फर्जी MM-11 से करोड़ों की राजस्व चोरी का पर्दाफाश

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संतोष कुमार / रवि पाण्डेय

O- दो ट्रकों की जांच से उजागर हुआ अवैध खनन का संगठित सिंडिकेट, पांच आरोपी पकड़े गए।

O- फर्जी ई-रवन्ना, संदिग्ध सिक्योरिटी पेपर, दूसरे वाहनों के नंबर और जालसाजी के जरिए सरकारी राजस्व को करोड़ों की चपत पहुंचाने की आशंका, जांच का दायरा लगातार बढ़ा

सोनभद्र (उत्तरप्रदेश)। जिले में अवैध खनन और उपखनिज परिवहन से जुड़े एक कथित संगठित नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। जिला खान विभाग की नियमित जांच में पकड़े गए दो ट्रकों से शुरू हुई कार्रवाई अब ऐसे नेटवर्क तक पहुंच गई है, जिस पर फर्जी MM-11 (ई-रवन्ना), संदिग्ध सिक्योरिटी पेपर, दूसरे वाहनों के नंबरों और कथित जालसाजी के माध्यम से लंबे समय तक उपखनिज परिवहन कर सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की आशंका है।

मामले में रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने अजय प्रकाश, बृजेश, राजू तिवारी, रितेश और मोहन समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस, खान विभाग और अन्य जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की आर्थिक और आपराधिक परतों को खंगाल रही हैं। प्रारंभिक जांच के आधार पर अधिकारियों का मानना है कि यदि इसी प्रकार का फर्जीवाड़ा लंबे समय से संचालित होता रहा, तो यह उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े MM-11 एवं खनन राजस्व घोटालों में शामिल हो सकता है। हालांकि, करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका जांच के दायरे का हिस्सा है, जिसकी अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी।

दो ट्रकों की जांच बनी बड़े खुलासे की वजह

घटना की शुरुआत 23 जून 2026 को हुई, जब जिला खान विभाग की टीम रॉबर्ट्सगंज स्थित आरटीओ कार्यालय के पास नियमित चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान UP64 AT 5155 और UP64 AT 5156 नंबर के उपखनिज लदे ट्रकों को रोककर उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया गया।

प्रथम दृष्टया प्रस्तुत MM-11 (ई-रवन्ना) परिवहन प्रपत्र संदिग्ध लगे। विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन जांच करने पर दस्तावेजों में दर्ज विवरण और सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई।

वरिष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप ने क्या कहा

वरिष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप ने बताया कि नियमित चेकिंग के दौरान दो ट्रकों को पकड़ा गया था। दोनों वाहनों के दस्तावेजों की विभागीय जांच कराई गई, जिसमें MM-11 परिवहन प्रपत्र फर्जी पाए गए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि “अवैध खनन अथवा फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से उपखनिज का गैरकानूनी परिवहन करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शासन की मंशा के अनुरूप राजस्व चोरी और अवैध खनन पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।”

पोर्टल पर कुछ और, कागज पर कुछ और

एफआईआर के अनुसार जांच में पाया गया कि प्रस्तुत MM-11 की वैधता अवधि, क्रमांक और अन्य विवरण विभागीय पोर्टल से मेल नहीं खा रहे थे।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि जिस परिवहन प्रपत्र के आधार पर वाहन मिट्टी का परिवहन कर रहा था, उसी दस्तावेज में विभागीय रिकॉर्ड पर मौरंग दर्ज थी। इतना ही नहीं, प्रस्तुत दस्तावेज की वैधता अवधि भी समाप्त हो चुकी थी।

दूसरे वाहन का नंबर, अलग चेसिस

जांच के दौरान वाहन के चेसिस नंबर का सत्यापन कराया गया। इसमें पता चला कि वाहन पर लगी नंबर प्लेट का वास्तविक चेसिस नंबर किसी अन्य वाहन से संबंधित है। इससे यह आशंका मजबूत हुई कि सरकारी निगरानी व्यवस्था को धोखा देने के उद्देश्य से दूसरे वाहनों के नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

संदिग्ध सिक्योरिटी पेपर से बढ़ा शक

एफआईआर में उल्लेख है कि प्रस्तुत परिवहन प्रपत्र जिस सिक्योरिटी पेपर पर छपा था, वह एम/एस ए.के. इंटर प्राइजेज के प्रोपराइटर सुरेश कुमार पाठक के नाम निर्गत पाया गया।

विभागीय अभिलेखों की जांच में यह भी सामने आया कि उक्त सिक्योरिटी पेपर के चोरी होने अथवा दुरुपयोग की कोई सूचना विभाग को कभी नहीं दी गई थी। इससे जांच एजेंसियों को संदेह है कि सरकारी सुरक्षा कागजों का उपयोग कर फर्जी MM-11 तैयार किए गए और उन्हें असली दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया गया।

करोड़ों के राजस्व नुकसान की जांच

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस प्रकार के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल केवल इन दो ट्रकों तक सीमित था या लंबे समय से बड़े पैमाने पर अवैध खनन और परिवहन के लिए किया जा रहा था।

यदि जांच में यह स्थापित होता है कि फर्जी MM-11 के माध्यम से लगातार उपखनिज का परिवहन कराया गया, तो राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

गंभीर धाराओं में मुकदमा, पांच आरोपी गिरफ्तार

खनन निरीक्षक अतुल दुबे की तहरीर पर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के साथ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अजय प्रकाश, बृजेश, राजू तिवारी, रितेश और मोहन को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

प्रदेश के सबसे बड़े खनन घोटालों में शामिल हो सकता है मामला

जांच अब केवल दो ट्रकों तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस और खान विभाग यह भी खंगाल रहे हैं कि क्या इसी तरह के फर्जी MM-11, नकली दस्तावेजों और दूसरे वाहनों के नंबरों के सहारे बड़े पैमाने पर अवैध खनन एवं परिवहन का संगठित नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।

यदि जांच में अब तक सामने आए आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े MM-11 फर्जीवाड़ा, अवैध खनन एवं राजस्व चोरी के मामला हो सकता है।

घोटाले का मुख्य तथ्य

दो ट्रकों की नियमित चेकिंग से पूरे मामले का खुलासादोनों वाहनों के MM-11 (ई-रवन्ना) परिवहन प्रपत्र फर्जी पाए गए।

विभागीय पोर्टल और प्रस्तुत दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां मिलीं। दूसरे वाहन के नंबर और संदिग्ध सिक्योरिटी पेपर के उपयोग के संकेत मिले है ।

वरिष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप ने अवैध खनन और फर्जी परिवहन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

अजय प्रकाश, बृजेश, राजू तिवारी, रितेश और मोहन पुलिस के गिरफ्त मे । जांच अब संभावित करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान और पूरे अवैध खनन सिंडिकेट की आर्थिक जांच की ओर बढ़ चुकी है।

लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान का एंगल भी जांच के दायरे में है; अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

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