विकास कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
अनपरा, सोनभद्र । जिले की नगर पंचायतों में विकास कार्यों के निष्पादन को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि कुछ बाहरी संविदाकार टेंडर प्राप्त करने के बाद स्वयं कार्य न कर उसे पेटी संविदाकारों को सौंप देते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मूल संविदाकार टेंडर हासिल करने के बाद आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देते हैं और कार्य को कम दर पर पेटी संविदाकारों से करवाने का प्रयास करते हैं।
आरोप है कि कई मामलों में उपयुक्त पेटी संविदाकार की तलाश में महीनों तक कार्य शुरू ही नहीं हो पाता, जिससे विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं और नगर पंचायतों में अनावश्यक विलंब होता है।
यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पेटी संविदाकारों के पास अक्सर पर्याप्त संसाधन और तकनीकी क्षमता नहीं होती, जिसके कारण कार्य की गुणवत्ता गिरती है। निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा न होने से आम जनता को भी असुविधा झेलनी पड़ती है।
स्थानीय चर्चा के अनुसार कई मामलों में पेटी संविदाकार कार्य पूरा करने के बाद भी समय पर भुगतान से वंचित रह जाते हैं। आरोप है कि नगर पंचायत से भुगतान मिलने के बाद भी मूल संविदाकार उप-संविदाकारों का भुगतान लंबित रखते हैं, जिससे आर्थिक शोषण, विवाद और तनाव की स्थिति बन रही है।
जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों का मानना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि _जिस संविदाकार को टेंडर आवंटित किया गया है, उसी को कार्य का प्रत्यक्ष निष्पादन करना चाहिए तथा भुगतान और गुणवत्ता की संपूर्ण जिम्मेदारी भी उसी की तय होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी एवं पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
इस संबंध में एडीएम वित्त एवं राजस्व वागीश शुक्ला से दूरभाष पर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया, किंतु संपर्क नहीं हो पाया।






