नामांकन रद्द होने पर मचा सियासी घमासान: कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर लगाए भाजपा के इशारे पर काम करने के आरोप

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अमित मिश्रा

O- नामांकन खारिज होने पर सियासी भूचाल: कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर लगाए भाजपा के इशारे पर काम करने के आरोप

O- लोकतंत्र की हत्या’ का आरोप, सड़क से अदालत तक लड़ाई लड़ने का ऐलान

सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) । निर्वाचन आयोग द्वारा वरिष्ठ कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज किए जाने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए निर्वाचन आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।

कांग्रेस का कहना है कि आयोग ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना केवल एक शिकायत और नोटिस को आधार बनाकर नामांकन निरस्त कर दिया, जबकि भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी भी शिकायत पर अंतिम निर्णय से पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाता है।

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि जिस मामले में अभी न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई और केवल नोटिस जारी हुआ है, उसे आधार बनाकर उम्मीदवार की पात्रता पर सवाल उठाना कानून और संविधान की भावना के विपरीत है। कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि भारतीय न्याय प्रणाली में नोटिस जारी होना और दोष सिद्ध होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। ऐसे में केवल नोटिस को आधार बनाकर किसी उम्मीदवार का नामांकन रद्द करना गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े करता है।

कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश का लोकतांत्रिक ढांचा तभी मजबूत रह सकता है जब संवैधानिक संस्थाएं राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कार्य करें। पार्टी का आरोप है कि आयोग भाजपा के “एजेंट” की तरह काम करता दिखाई दे रहा है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर संसद और न्यायालय तक संघर्ष करेगी। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और कानूनी विकल्प का इस्तेमाल किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस छिड़ सकती है।

फिलहाल निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विपक्ष के हमलों के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

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