दो नाबालिग बच्चियो से लैंगिक अपराध के दोषी को उम्रकैद की सजा

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राजेश कुमार पाठक

कोर्ट ने  ₹73 हजार का लगाया अर्थदंड

आरोप तय होने के महज 4 माह 4 दिन में सुनवाई पूरी कर सुनाई सजा।


सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। नाबालिग बच्चियों के साथ गंभीर लैंगिक अपराध के मामले में दोषी को उम्रकैद व ₹73 हजार अर्थदंड की सजा पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले की आरोप तय होने के महज 4 माह 4 दिन में सुनवाई पूरी कर सुनाई सजा है।

नाबालिग बच्चियों के साथ गंभीर लैंगिक अपराध के मामले में पॉक्सो अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अभियुक्त अली फैयाज उर्फ फैज पुत्र सलीमुद्दीन अंसारी, निवासी अनपरा को दोषसिद्ध कर शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर विभिन्न धाराओं में कुल ₹73,000 का अर्थदंड भी लगाया है।

अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट , ओमकार शुक्ला की अदालत ने यह महत्वपूर्ण निर्णय थाना अनपरा के मुकदमा अपराध संख्या 70/2026 में सुनाया।
अभियोजन के अनुसार अभियुक्त ने दो नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ लैंगिक अपराध किया था। मामले में अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m), 65(2), 75(1)(i), 351(3) तथा POCSO Act की धारा 5(m)/6, 5L/6, 9L/10 एवं 9m/10 के तहत आरोप विरचित किए गए थे।
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पीड़िताओं के महत्वपूर्ण बयानों के साथ-साथ चिकित्सकीय साक्ष्य, जन्मतिथि संबंधी दस्तावेज, पुलिस विवेचना एवं अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र परीक्षण करने के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषी पाया। अदालत ने पॉक्सो एक्ट के गंभीर अपराधों के लिए अभियुक्त को आजीवन कारावास अर्थात उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त कुल ₹73,000 अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया गया है।
सजा के प्रश्न पर न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता, पीड़िताओं पर पड़े प्रभाव तथा समाज पर उसके प्रभाव को दंड निर्धारण में महत्वपूर्ण माना।


न्यायालय ने मामले की परिस्थितियों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए माना कि कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है।

इस फैसले की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि अभियुक्त पर आरोप विरचित होने के बाद महज 4 माह 4 दिन में सुनवाई पूरी कर उसे दोषसिद्ध करते हुए सजा सुना दी गई। पॉक्सो जैसे गंभीर अपराध में त्वरित सुनवाई के माध्यम से पीड़िताओं को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस मामले में राज्य की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि एवं नीरज कुमार सिंह ने बहस किया।

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