“6 महीने बंद होगी जीवनरेखा”: सोनभद्र में ओवरब्रिज निर्माण से दो लाख आबादी पर संकट

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रवि पाण्डेय / अमित मिश्रा

O- विकास की कीमत जनता क्यों चुकाए? रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से स्कूल, अस्पताल और बाजार प्रभावित

O- स्कूल के बच्चों से लेकर मरीजों तक, किसान से लेकर व्यापारियों तक – एक फैसले ने बढ़ाई पूरे इलाके की चिंता

O-सोनभद्र में रेलवे का बड़ा फैसला: 20 किलोमीटर बढ़ेगी दूरी, मरीजों और बच्चों की बढ़ी मुश्किलें

O- ओवरब्रिज निर्माण बना जनसंकट: जिला मुख्यालय से कटेगी दो-तिहाई आबादी

O- स्कूल, अस्पताल, खेती और व्यापार सब प्रभावित: छह महीने सड़क बंद होने से जनता बेहाल

O- “विकास बनाम जीवनरेखा”: सोनभद्र में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण से दो लाख आबादी पर संकट, छह महीने कटेगा जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। सोनभद्र जिले में रेलवे द्वारा प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण अब केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ा बड़ा जनसंकट बनता जा रहा है।

कलवारी से खलियारी को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे-154 पर रॉबर्ट्सगंज नगर स्थित रेलवे क्रॉसिंग को सोनभद्र रेलवे प्रशासन द्वारा अगले छह महीने के लिए बंद किए जाने की तैयारी है। रेलवे का कहना है कि यहां डबल लाइन परियोजना और रेलवे ओवरब्रिज (ROB) निर्माण कार्य होना है, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से आवागमन रोकना अनिवार्य होगा।

लेकिन इस निर्णय का असर केवल सड़क बंद होने तक सीमित नहीं है। रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र की लगभग दो-तिहाई आबादी का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क टूट जाएगा। लाखों लोगों को अब 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।

सबसे अधिक असर उन स्कूली बच्चों पर पड़ेगा जो रोज इसी मार्ग से शहर के स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचते हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूल पहुंचने में करीब दो घंटे और वापस घर लौटने में उतना ही समय लग सकता है। अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और सुरक्षा तीनों प्रभावित होंगे।

एम्बुलेंस, मरीज और इमरजेंसी सेवाओं पर सबसे बड़ा खतरा

क्षेत्र के लोगों की सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर है। जिला अस्पताल, निजी अस्पताल, ट्रामा सेंटर और प्रमुख चिकित्सा सुविधाएं रॉबर्ट्सगंज मुख्यालय में स्थित हैं। ऐसे में 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं को लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि “गंभीर मरीजों के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, लेकिन अब अस्पताल पहुंचने में अतिरिक्त समय लगेगा। कहीं ऐसा न हो कि सड़क बंद होने की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़े।”

व्यापार और खेती पर भी पड़ेगा सीधा असर

यह मार्ग स्थानीय व्यापारियों, किसानों और मजदूरों के लिए भी जीवनरेखा माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों से सब्जियां, अनाज, दूध और अन्य कृषि उत्पाद रोज इसी रास्ते से मंडियों तक पहुंचते हैं। सड़क बंद होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, समय अधिक लगेगा और छोटे व्यापारियों की कमर टूट सकती है।

दिहाड़ी मजदूरों को भी रोज शहर पहुंचने के लिए अतिरिक्त किराया और समय खर्च करना पड़ेगा। कई लोगों ने आशंका जताई है कि रोज 100 से 200 रुपये अतिरिक्त खर्च होने से गरीब परिवारों पर आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।

“विकास जरूरी, लेकिन जनता को सजा क्यों?” स्थानीय लोगों का सवाल

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि वे रेलवे ओवरब्रिज और दोहरीकरण परियोजना का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन बिना मजबूत वैकल्पिक व्यवस्था के मुख्य मार्ग बंद करना सीधे जनता को परेशानी में धकेलना है।

स्थानीय अभिभावक का बयान:

“हमारे बच्चे सुबह अंधेरे में निकलेंगे और शाम को लौटेंगे। छह महीने तक यह हाल रहा तो पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।”

एक किसान ने कहा:

“खेती का सामान और फसल मंडी तक पहुंचाने में पहले ही दिक्कत है, अब 20 किलोमीटर अतिरिक्त घूमकर जाना पड़ेगा। डीजल, समय और मजदूरी सब बढ़ जाएगा।”

एक व्यापारी ने नाराजगी जताते हुए कहा:

“सड़क बंद होने का मतलब बाजार बंद होने जैसा है। ग्राहक कम होंगे, ट्रांसपोर्ट महंगा होगा और छोटे दुकानदार सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।”

रेलवे का पक्ष

मौके पर पहुंचे डीजीएमएस रेलवे अधिकारी ने कहा:

“रेलवे को यहां दोहरीकरण और ओवरब्रिज निर्माण का कार्य करना है। सुरक्षा की दृष्टि से रेलवे क्रॉसिंग के 300 मीटर पश्चिम और 300 मीटर पूर्व दिशा में मार्ग बंद करना आवश्यक है। वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की जिम्मेदारी है।”

जिलाधिकारी ने दिया आश्वासन

जिलाधिकारी चर्चित गौंड ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा है कि आवागमन बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाएगी।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक जमीन पर कोई ठोस तैयारी दिखाई नहीं दे रही है।

बड़ा सवाल: क्या विकास परियोजनाओं में जनता की परेशानी का आकलन जरूरी नहीं?

सोनभद्र का यह मामला अब केवल एक जिले का स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। यह सवाल पूरे देश के सामने खड़ा करता है कि क्या बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का पर्याप्त आकलन किया जाता है?

रेलवे ओवरब्रिज विकास का प्रतीक हो सकता है, लेकिन यदि उसी विकास की कीमत आम जनता को शिक्षा, इलाज और रोजी-रोटी के संकट के रूप में चुकानी पड़े, तो यह बहस राष्ट्रीय स्तर पर उठना तय माना जा रहा है।

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