कनहर सिंचाई परियोजना: बगिया से रामगढ़ तक सिंचाई पर संकट, खेत के स्तर से नीचे बन रही नहर

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नवीन कुमार


कोन (सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। बहुउद्देशीय कनहर परियोजना के तहत क्षेत्र में इन दिनों तेजी से नहर निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता और नहर की ऊंचाई को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। किसानों का आरोप है कि बगिया से रामगढ़ तक बनाई जा रही नहर खेतों के स्तर से काफी नीचे खोदी जा रही है, जिससे नहर बनने के बाद भी हजारों बीघा कृषि भूमि असिंचित रह जाने का खतरा पैदा हो गया है।


इस क्षेत्र के किसान धीरज, अनिल, शिव प्रसाद, नीरज, संजय, अजय और अमरनाथ ने बताया कि सरकार किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर नहर निर्माण करा रही है, लेकिन यदि नहर ही खेतों से नीचे बन जाएगी तो पानी खेतों तक कैसे पहुंचेगा। किसानों का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है।


ग्रामीणों के अनुसार बगिया से झरिया तक लगभग पांच किलोमीटर लंबी नहर में करीब 16 मीटर की ढाल दी जा रही है। जानकारों का मानना है कि सामान्य परिस्थितियों में नहर की ढाल सीमित होनी चाहिए, ताकि पानी का प्रवाह संतुलित रहे और आसपास के खेतों तक आसानी से पहुंच सके। अत्यधिक ढाल होने से नहर आगे जाकर काफी नीचे चली जाएगी, जिससे ऊंचाई पर स्थित खेतों में पानी पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा।


किसानों ने बताया कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में किसानों को सिंचाई के लिए फिर ट्यूबवेल और बारिश पर निर्भर रहना पड़ेगा। ग्रामीणों ने नहर निर्माण की स्वतंत्र जांच कराने और आवश्यकतानुसार डिजाइन में संशोधन की मांग उठाई है।


मामले को गंभीरता से लेते हुए कोन ब्लॉक प्रमुख रूबी मिश्रा ने सदर विधायक, जिलाधिकारी तथा परियोजना से जुड़े अधिकारियों को पत्र भेजकर किसानों के हित में गुणवत्तापूर्ण एवं उपयोगी नहर निर्माण कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसानों को सिंचाई सुविधा देने की है, इसलिए निर्माण कार्य में ऐसी खामियां नहीं रहनी चाहिए जिससे किसानों को लाभ के बजाय नुकसान उठाना पड़े।


वहीं इस संबंध में अवर अभियंता विमलेश यादव ने बताया कि नहर का डिजाइन विभागीय उच्चाधिकारियों के स्तर से स्वीकृत होकर आता है। स्थानीय स्तर पर केवल निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नहर निर्माण में केवल ढाल ही नहीं, बल्कि जल प्रवाह, भूमि की स्थिति और तकनीकी मानकों सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। किसानों की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी।

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