पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

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अमित मिश्रा

O- सोनभद्र में दो दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

O- स्वयं के स्रोत से आय बढ़ाकर पंचायतें करें विकास के नए अध्याय की शुरुआत : उपनिदेशक ए.के. सिंह

सोनभद्र । उपनिदेशक (पंचायत), विंध्याचल मंडल मिर्जापुर के निर्देशन में “पंचायतों के स्वयं के स्रोत से आय” विषय पर जनपद सोनभद्र के विभिन्न विकासखंडों से चयनित ग्राम पंचायतों के प्रधानों एवं सचिवों के लिए दो दिवसीय अनावासीय प्रशिक्षण का आयोजन डीपीआरसी सोनभद्र भवन में किया गया। यह प्रशिक्षण 30 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक दो अलग-अलग बैचों में आयोजित हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन कर हुआ शुभारंभ

प्रशिक्षण का शुभारंभ जिला पंचायत राज अधिकारी श्रीमती नमिता शरण ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि “ग्राम पंचायतें शासन की सबसे सशक्त इकाई हैं। विकास कार्यों के लिए निधि आवश्यक होती है, परंतु केंद्र एवं राज्य सरकारों से प्राप्त धनराशि अक्सर निश्चित योजनाओं में बंधी होती है, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के कई कार्य अधूरे रह जाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि अगर पंचायतें अपने स्वयं के स्रोतों (Own Source of Revenue – OSR) से आय अर्जित करें, तो वे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को स्वतंत्र रूप से संपादित कर सकती हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ करते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी श्रीमती नमिता शरण।

स्वावलंबी पंचायत ही सशक्त पंचायत,  ए.के. सिंह

प्रशिक्षण के दूसरे दिवस पर उपनिदेशक (पंचायत) विंध्याचल मंडल, मिर्जापुर श्री ए.के. सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने पंचायतों के विभिन्न संभावित राजस्व स्रोतों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि “आत्मनिर्भर पंचायत का अर्थ केवल योजनाओं पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि स्वयं अपनी आर्थिक शक्ति विकसित करना है।”
उन्होंने बताया कि जिन पंचायतों की जनसंख्या 1500 से कम है, यदि वे स्वयं के स्रोत से ₹10,000 तक की आय अर्जित करती हैं, तो उन्हें ₹50,000 तक की प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा “आत्मनिर्भर पंचायत पुरस्कार योजना” के अंतर्गत दी जाती है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा,

“जो पंचायतें ₹10,000 से अधिक की स्वयं की आय अर्जित करेंगी, उन्हें सरकार उनकी आय का पाँच गुना तक प्रोत्साहन धनराशि प्रदान कर रही है।”
उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र में संभावित राजस्व स्रोतों की पहचान कर अधिक से अधिक आय अर्जित करें और अपनी पंचायत को विकास की दिशा में अग्रसर करें।

प्रशिक्षकों ने दिए व्यावहारिक सुझाव

दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रथम बैच में प्रशिक्षक रोहित तिवारी एवं विनय चौबे, तथा द्वितीय बैच में संदीप कश्यप एवं अंजली पांडेय ने प्रतिभागियों को पंचायत की आय से संबंधित सभी बिंदुओं,  जैसे हाट बाजार शुल्क, भवन किराया, जल कर, सफाई शुल्क, विज्ञापन शुल्क आदि पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को राजस्व सृजन के आधुनिक तरीकों, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता की बारीकियों से भी अवगत कराया गया।

डीपीआरसी सोनभद्र बना सीखने का केंद्र

कार्यक्रम का कुशल संचालन वरिष्ठ फैकल्टी श्री राजेश त्रिपाठी ने किया। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न ब्लॉकों के सचिवों एवं प्रधानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बेहतर पंचायत प्रबंधन की दिशा में सुझाव दिए।
प्रशिक्षण के समापन सत्र में प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने ग्राम पंचायतों में स्वयं की आय के स्रोतों की पहचान कर आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।

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