मेडिकल संचालक द्वारा इंजेक्शन लगाने व दवा देने से 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी की मौत

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दिलीप बाजपेयी

परिजनों ने जमकर किया हंगामा,कार्रवाई की किया मांग

महोबा। जनपद में नियमों को धता बताकर संचालित सैकड़ों मेडिकल स्टोर आम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेवार आँख पर पट्टी बांध गांधारी बने हुए हैं। अधिकांश मेडिकल स्टोर में बिना किसी डिग्री व डिप्लोमा के अनुभवहीन लोगों को काम पर रख लिया जाता है। कई बार बिना डॉक्टरों की सलाह के मेडिकल स्टोर संचालकों व नौसिखियों द्वारा दी गई दवाएं लोगों की जिंदगी ले लेतीं हैं। जिसका एक और उदाहरण देखने को मिला, जहाँ अपनी बहन के यहाँ आई 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी को बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह के बिना मेडिकल संचालक द्वारा बॉटल व इंजेक्शन लगाने और दवा देने से उसकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज झांसी में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। किशोरी की मौत से आक्रोशित परिजनों ने पुलिस को तहरीर देते हुए मेडिकल संचालक के खिलाफ कार्यवाही की माँग की है। वहीं पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पीएम को भेज मामले की जाँच शुरू कर दी है।

आपको बता दें कि श्रीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत किशोरगंज निवासी विनोद विश्वकर्मा की 14 वर्षीय साली खुशी उसके यहाँ रह रही थी। उसे बुखार आने पर बीती 12 व 13 जून को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीनगर के पास सूर्यांश मेडिकल स्टोर संचालक अरविंद गुप्ता ने बॉटल व इंजेक्शन लगाए और दवा भी दी लेकिन इलाज के दौरान अचानक उसकी हालत बिगड़ी तो परिजन छतरपुर मध्यप्रदेश ले गए, जहाँ से मेडिकल कॉलेज झाँसी रेफर कर दिया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अंधेर तो यह है कि डॉक्टरी पेशे को विशुद्ध व्यवसाय बनाकर डॉक्टर की जगह खुद इलाज करने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों और झोलाझाप डॉक्टरों की जिलेभर में भरमार हो गई है। गांव गाँव व कस्बों से लेकर मुख्यालय तक में स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों को ताक पर रख निजी क्लीनिक, मेडिकल स्टोर व झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन इन पर कार्यवाही होने की वजाय विभागीय जिम्मेवारों की कृपा पात्रता बनी हुई है। मेडिकल स्टोर, निजी क्लीनिकों व जाँच लैब संचालकों द्वारा धांधली, अंधेरगर्दी व मनमानी लूट करने के एवज में किस किस को कितने कितने वजन के लिफाफे भेजे जाते हैं, ये जानते सब हैं, लेकिन इनकी पकड़ व हनक के चलते बोलता कोई नहीं।

तो क्या सीएमओ को सिर्फ एसी में बैठकर कागजों पर हस्ताक्षर और वीआईपी मीटिंग अटेंड करने के लिए ही जिले में तैनात किया गया है..? क्या ड्रग इंस्पेक्टर का पद मेडिकल स्टोर की जाँच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करने और वसूली के लिए ही बना है..? इस नाबालिग की मौत स्वास्थ्य विभाग और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करने वाले सत्ताधीशों के मुँह पर तमाचा  और इंसानियत के लिए शर्मनाक है।

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