सोनभद्र के जंगलों में ‘हरा सोना’: आयुष टीम की बड़ी खोज, पलास–सलई से खुलेगा रोजगार का रास्ता

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आयुष सलाहकार मुकेश कुमार बोले- पलास के सभी अंग औषधीय, स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार संभव

म्योरपुर, सोनभद्र। वन प्रभाग रेणुकूट के म्योरपुर, पिपरी, दुद्धी और बघाडू समेत विभिन्न वन क्षेत्रों में आयुष मंत्रालय की 4 सदस्यीय शोध टीम ने सलाहकार पादप वर्गिकी मुकेश कुमार के नेतृत्व में व्यापक सर्वे किया। टीम ने औषधीय वनस्पतियों के नमूने एकत्र कर परीक्षण के लिए गाजियाबाद की लैब भेजे हैं। टीम ने ग्रामीण वैद्यों और पारंपरिक वनौषधि जानकारों से बातचीत कर वर्षों से प्रचलित लोक ज्ञान भी संकलित किया। मुकेश कुमार ने बताया कि आयुष मंत्रालय नमूनों की वैज्ञानिक जांच कर उनकी उपयोगिता और खुराक की मात्रा तय करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार सोनभद्र के घने वन औषधीय दृष्टि से समृद्ध हैं। यहां गिलोय, अश्वगंधा, कालमेघ, शतावरी, सफेद मूसली, अर्जुन, हरड़, बहेड़ा, आंवला, निर्गुंडी, भुई आंवला, गुड़मार, चिरौंजी और बेल जैसी वनस्पतियां पाई जाती हैं। टीम ने विशेष रूप से राज्य पुष्प पलास और सीमित संख्या में पाए जाने वाले सलई पेड़ों की उपयोगिता पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि पलास के फूल, फल, जड़ और तना सभी औषधीय रूप से लाभकारी हैं और इनके आधार पर स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर स्वरोजगार विकसित किया जा सकता है। डीएफओ कमल कुमार ने बताया कि आयुष टीम का उद्देश्य औषधीय वनस्पतियों की पहचान, संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन है। ग्रामीण वैद्यों के पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक आधार से जोड़कर दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण और औषधीय खेती को बढ़ावा देना भी लक्ष्य है। सर्वे के दौरान रेंजर जबर सिंह और पिपरी रेंजर राघवेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।

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