अमित मिश्रा
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद के धार्मिक व पौराणिक महत्व के बरैला महादेव मन्दिर पर भगवान भोलेनाथ का विगत 65 वर्षो की भांति इस वर्ष भी बरैला बाबा भोले नाथ श्रृंगार समिति द्वारा बरैला महोदव का सावन माह के आखिरी बुधवार और वृहस्पतिवार को दो दिवसीय श्रृंगार महोत्सव समारोह सम्पन हुआ। जिसमें प्रथम दिवस बुधवार को बरैला महादेव का भव्य मनमोहक फूलों की कसीदाकारी के साथ अर्द्धनारीश्वर रूप में किया गया।
भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार श्रृद्धालू को आध्यात्मिक आसक्ति से अभिसिंचित कर रहा था। सायं 4 बजे श्रृंगारित बरैला महोदव का पट खुलने के पश्चात भव्य आरती से श्रृंगार महोत्सव का शुभारम्भ होते ही श्रृद्धालु भक्तों का दर्शन पूजन हेतु तांता लग गया। भव्य दिव्य स्वरूप में विराजमान श्रृंगारित बरैला महादेव भक्तों को मंत्र मुग्ध कर रहे थे। इस दौरान बुदियां प्रसाद का कार्यक्रम चलता रहा।
भजन कीर्तन गायन मण्डलीय द्वारा सुन्दर काण्ड का संगीतमय पाठ करने के पश्चात प्रस्तुत संगीतमय भजनों जैसे ‘‘जय शंकर चन्द्र भाल गंगाधर कण्ठ व्याल, उमानाथ महादेव काटो भव बन्ध जाल’’ तथा ‘‘भगवन सब कमाल हे प्यारे तेरी मेरी ढाल है प्यारे, ये बात पर याद रखियों महाकाल महाकाल है प्यारे, शंकरा करता करम जगदीश्वरा परमेश्वरा’’ एवं ‘‘भोले-भोले हो शिवराजा भोले-भोले हो, शम्भू शंकरा मन में तू बसा, शम्भू शंकरा दिल में तू सदा; तनमन में तेरा वास दिल की तू आस’’ तथा ‘‘लीन हो रहा हूॅ मैं शिव में भोले नाथ में; महादेव में महाकाल में’’ जैसे अनेक शिव भजनों की प्रस्तुति से श्रृंगार महोत्सव में समां बाॅध दिया। तत्पश्चात सायं 7 बजे से भण्डारा का प्रसाद पूड़ी, सब्जी, हलवा ग्रहण कर श्रृद्धालु भक्त तृप्त हो रहे थे। देर रात तक भक्तों का दर्शन पूजन प्रसाद ग्रहण का कार्यक्रम चलता रहा है।
द्वितीय दिन दोपहर बाद भव्य हवन हुआ तत्पश्चात पूर्णाहूति स्वरूप महाप्रसाद बाटीं चोखा, चावल, दाल, खीर, सलाद का महादेव का भोग लगाकर महादेव की आरती की गयी, तथा समिति के लोगों और अनेक श्रृद्धालु भक्तों स्नेहीजनों ने प्रसाद ग्रहण किया।
बरैलाबाबा भोलेनाथ श्रृगांर समिति के संयोजक, अध्यक्ष व समस्त पदाधिकारियों ने महोदव को नमन करते हुये श्रृद्धालु भक्तों सहयोगी समाजसेवियों तथा मीडियाजगत के मित्रों का आभार व्यक्त कर धन्यावाद देते हुये बरैला महादेव का श्रृंगार महोत्सव अगले वर्ष सावन माह के अंतिम बुधवार तक स्थगन की घोषणा की।







