8वें वेतन आयोग के सामने AINPSEF ने रखीं शिक्षकों और NPS कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

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लकी केशरी

O- 3.83 फिटमेंट फैक्टर, गारंटीकृत पेंशन, HRA में बढ़ोतरी और शिक्षकों की सेवा अवधि 65 वर्ष करने की मांग

चंदौली (उत्तर प्रदेश) । 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने शिक्षकों और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाया है। फेडरेशन ने वेतन संरचना में सुधार से लेकर सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, सेवा शर्तों और डिजिटल कार्य संस्कृति तक कई महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के सामने रखे।

फेडरेशन की ओर से आयोग को विस्तृत मेमोरेंडम और प्रजेंटेशन सौंपा गया। बैठक में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, सदस्य पूलक घोष, सदस्य पंकज जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और अपेक्षाओं को आयोग के समक्ष विस्तार से रखा। उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश अध्यक्ष अंकुर त्रिपाठी तथा प्रदेश संगठन मंत्री अमित कुमार पाण्डेय ने भी प्रदेश सहित देशभर के शिक्षकों और NPS कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

3.83 फिटमेंट फैक्टर और HRA बढ़ाने की मांग

फेडरेशन ने 8वें वेतन आयोग में 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की है। इसके अलावा हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को 15, 30 और 45 प्रतिशत करने का सुझाव दिया गया है।

फेडरेशन ने कहा कि महंगाई भत्ता (DA) 25 प्रतिशत होने पर उसे मूल वेतन में समाहित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट अलाउंस और चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस (CEA) में वृद्धि तथा कर्मचारियों के लिए डिजिटल अलाउंस लागू करने की मांग भी रखी गई।

परिवार इकाई की परिभाषा को मौजूदा तीन सदस्यों से बढ़ाकर पांच सदस्यों तक करने का प्रस्ताव भी आयोग के समक्ष रखा गया।

NPS और UPS कर्मचारियों के लिए गारंटीकृत पेंशन की मांग

बैठक में कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।

AINPSEF ने कहा कि NPS और UPS के तहत कर्मचारियों को वृद्धावस्था में पर्याप्त और सुनिश्चित आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। फेडरेशन ने गारंटीकृत पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की।

इसके साथ ही 30 मार्च 2021 के प्रावधानों के अनुरूप मृत्यु एवं दिव्यांगता के मामलों की तरह नियमित, स्वैच्छिक और अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों में भी पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसी सुरक्षा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया।

‘वन नेशन–वन सर्विस मोबिलिटी’ की मांग

फेडरेशन ने “वन नेशन–वन सर्विस मोबिलिटी” की अवधारणा लागू करने की मांग भी आयोग के सामने रखी।

संगठन का कहना है कि केंद्र, राज्य, केंद्र शासित प्रदेशों और स्वायत्तशासी संस्थाओं के कर्मचारियों को सेवा सुधारों का समान लाभ मिलना चाहिए। कर्मचारियों के बीच सेवा शर्तों और अवसरों में मौजूद असमानताओं को दूर करने की दिशा में भी कदम उठाए जाने की मांग की गई।

शिक्षकों की सेवा अवधि 65 वर्ष करने का प्रस्ताव

शिक्षकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी बैठक में उठाए गए।

AINPSEF ने शिक्षकों को 65 वर्ष की आयु तक सेवा का अवसर देने की मांग की। इसके अलावा शिक्षकों के लिए:

  • 30 दिन अर्जित अवकाश
  • 45 दिन सोशल ऑब्लिगेशन लीव
  • 45 दिन फैमिली केयर लीव

देने का प्रस्ताव आयोग के समक्ष रखा गया।

फेडरेशन ने कहा कि मौजूदा समय में शिक्षकों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली तेजी से डिजिटल हो रही है। ऐसे में डिजिटल कार्य से जुड़े अतिरिक्त दायित्वों और खर्च को ध्यान में रखते हुए डिजिटल अलाउंस जैसी सुविधाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

‘सिर्फ वेतन वृद्धि नहीं, सम्मानजनक सेवा शर्तें भी जरूरी’

बैठक के बाद AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है। संगठन कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक सेवा शर्तें, मजबूत सामाजिक सुरक्षा और आधुनिक कार्य सुविधाएं सुनिश्चित कराने की दिशा में काम कर रहा है।

वहीं AINPSEF के राष्ट्रीय प्रवक्ता अंकुर त्रिपाठी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को मिले प्रतिनिधित्व के माध्यम से प्रदेश के शिक्षकों और NPS कर्मचारियों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाया गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग कर्मचारियों के हित में सकारात्मक और दूरगामी सिफारिशें करेगा।

कर्मचारियों की नजर अब आयोग की सिफारिशों पर

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष रखी गई इन मांगों में वेतन, भत्ते, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, सेवा अवधि और कार्य सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। अब कर्मचारियों और शिक्षकों की नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग इन प्रस्तावों पर किस तरह विचार करता है और अपनी अंतिम सिफारिशों में किन मांगों को जगह देता है।

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