मोदी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के दिन सख्त हुए विधायक भूपेश चौबे, स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ी पर दी खुली चेतावनी

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अमित मिश्रा

O- जनता तक नहीं पहुंचेंगी योजनाएं तो जाएंगे अधिकारी’, फर्जी डॉक्टर और अवैध अस्पतालों पर भी कार्रवाई का ऐलान

सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) । देश की राजनीति में बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने का नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया। इसी अवसर पर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र सदर विधायक भूपेश चौबे ने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया और स्पष्ट कहा कि विकास योजनाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विधायक भूपेश चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है। ऐसे में जो अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बनेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान विधायक ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) रिपुंजय श्रीवास्तव के खिलाफ मिली शिकायतों पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या अनियमितता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों को हटाया जाएगा। उन्होंने विभागीय जांच कराकर सभी सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान विधायक ने कोन थाना क्षेत्र में संचालित ग्लोबल हॉस्पिटल का मामला भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में एक व्यक्ति कथित रूप से डॉक्टर बनकर इलाज कर रहा था, जबकि उसके खिलाफ पहले भी कार्रवाई होने की जानकारी सामने आई है। विधायक ने सवाल उठाया कि यदि पहले कार्रवाई हुई थी तो अस्पताल दोबारा कैसे संचालित होने लगा।

भूपेश चौबे ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी और अस्पताल संचालक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार की प्राथमिकता है कि गरीब, किसान, नौजवान और आम नागरिक तक योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में विधायक के इस सख्त रुख को स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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