रवि पाण्डेय / अमित मिश्रा
O- “इकरारनामा के नाम पर बैनामा”, “10 लाख ट्रांसफर दिखाया लेकिन पैसा नहीं मिला”
O- “अब परिवार को जान का खतरा” – पीड़ित पारस गोंड का आरोप
0- सोनभद्र से उठी शिकायत ने लखनऊ तक बढ़ाई बेचैनी, राज्यमंत्री संजीव गोंड और पुत्र अजय देव गोंड पर लगे गंभीर आरोपों से प्रदेश की राजनीति गरमाई
सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सत्ता, प्रशासन और आदिवासी अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र निवासी आदिवासी युवक पारस गोंड ने प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड और उनके पुत्र अजय देव गोंड पर जमीन कब्जाने, धोखाधड़ी, राजनीतिक दबाव और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामले को लेकर पीड़ित ने मुख्यमंत्री, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार के IGRS (जनसुनवाई) पोर्टल पर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
“भरोसा किया… और जमीन चली गई”
पीड़ित पारस गोंड ने अपने शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि वह अनुसूचित जनजाति समुदाय का गरीब ग्रामीण है। उसके अनुसार वर्ष 2022 में उसकी भूमि का सौदा “इकरारनामा” के रूप में होना तय हुआ था।

लेकिन बाद में कथित रूप से दस्तावेजों में बदलाव कर मंत्री के पुत्र अजय देव गोंड और उनके करीबी लोगों के नाम “बैनामा” करा लिया गया।
पीड़ित का दावा है कि:
- उससे केवल हस्ताक्षर और अंगूठा लगवाया गया,
- दस्तावेज मंत्री पक्ष द्वारा तैयार कराए गए,
- उसे वास्तविक दस्तावेज नहीं पढ़ाया गया,
- और जमीन के बदले कोई भुगतान नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया राजनीतिक प्रभाव और विश्वास का फायदा उठाकर कराई गई।
“10 लाख रुपये ट्रांसफर दिखाए गए, लेकिन पैसा नहीं मिला”
शिकायत पत्र में एक और बड़ा आरोप लगाया गया है। पीड़ित का कहना है कि कथित बैनामा दस्तावेज में उसके खाते में 10 लाख रुपये ट्रांसफर होने का उल्लेख किया गया, जबकि उसके बैंक खाते में कोई रकम नहीं आई।
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कथित आर्थिक फर्जीवाड़ा और दस्तावेजी हेराफेरी का गंभीर मामला बन सकता है।
IGRS शिकायत संख्या बनी चर्चा का विषय
पीड़ित द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के IGRS पोर्टल पर दर्ज शिकायत संख्या:
- 40020026009409
- 40020026009408
अब जिले से लेकर लखनऊ तक चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
शिकायत में मांग की गई है कि:
✔ कथित बैनामा की जांच कराई जाए
✔ जमीन वापस दिलाई जाए
✔ मंत्री और उनके पुत्र की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो
✔ राजस्व अभिलेखों की जांच कराई जाए
✔ पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए
“अब जान का खतरा है”
पारस गोंड ने अपने शिकायती पत्र में यह भी लिखा है कि मामले को उठाने के बाद उसे और उसके परिवार को जान-माल का खतरा महसूस हो रहा है।
उसने प्रशासन से सुरक्षा की मांग करते हुए कहा है कि यदि उसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित लोगों की होगी।
पीड़ित पारस गोंड का बयान:
“मैं एक गरीब आदिवासी परिवार से हूं। मुझे भरोसे में लेकर कागजों पर हस्ताक्षर और अंगूठा लगवाया गया। बाद में पता चला कि इकरारनामा की जगह मेरी जमीन का बैनामा करा लिया गया। मेरे खाते में एक रुपया तक नहीं आया, लेकिन दस्तावेजों में लाखों रुपये ट्रांसफर दिखाए गए हैं। अब मुझे और मेरे परिवार को जान-माल का खतरा है। मैं सरकार और प्रशासन से सिर्फ न्याय चाहता हूं।”

पारस गोंड ने आगे कहा:
“यदि मेरे या मेरे परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी उन्हीं लोगों की होगी जिनके खिलाफ मैंने शिकायत की है। मैं चाहता हूं कि निष्पक्ष जांच हो और मेरी जमीन मुझे वापस दिलाई जाए।”
जिले में चर्चा: ‘क्या सत्ता के दबाव में हुई जमीन की रजिस्ट्री?’
सोनभद्र जिले में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन चुका है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक आदिवासी परिवार की जमीन सत्ता के प्रभाव में हस्तांतरित कराई गई?
मामले ने प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो राजस्व विभाग और रजिस्ट्री प्रक्रिया की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
विपक्ष को मिल सकता है बड़ा मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्षी दल इसे आदिवासी उत्पीड़न, सत्ता संरक्षण और प्रशासनिक दुरुपयोग से जोड़कर सरकार को घेर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
“जब किसी मंत्री पर सीधे जमीन कब्जाने जैसे आरोप लगते हैं, तो सरकार की जवाबदेही और जांच प्रक्रिया दोनों पर जनता की नजर रहती है।”
अब सरकार के सामने सबसे बड़े सवाल
क्या मंत्री के खिलाफ निष्पक्ष जांच होगी?
क्या आदिवासी युवक को न्याय मिलेगा?
क्या कथित फर्जी बैनामा की जांच कराई जाएगी?
क्या सरकार मंत्री से जवाब मांगेगी?
क्या प्रशासन राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कार्रवाई करेगा?
मंत्री पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक मंत्री संजीव कुमार गोंड या उनके पुत्र अजय देव गोंड की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित स्तर पर परीक्षण और जांच की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
सिर्फ जमीन विवाद नहीं, सत्ता और आदिवासी अधिकार की परीक्षा
सोनभद्र का यह मामला अब केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रदेश में आदिवासी अधिकार, सत्ता के प्रभाव, प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायिक निष्पक्षता की परीक्षा बनता जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि:
क्या यह शिकायत भी फाइलों में दब जाएगी?
या
योगी सरकार इस मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करेगी?
यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए शिकायती पत्र, दस्तावेजों और IGRS पोर्टल पर दर्ज शिकायत के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शासकीय जांच के बाद ही संभव होगी। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।






