निजी अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजनों का हंगामा

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नवीन कुमार

प्रशासन ने किया अस्पताल सील


एसडीएम व डिप्टी सीएमओ पहुंचे, जांच के आदेश


बोले एसडीएम- मानक विहीन अस्पतालों में बड़े ऑपरेशन मिले तो दर्ज होगा हत्या का मुकदमा


कोन (सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। जनपद के अति पिछड़े क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था इस कदर चरमरा गई है कि कुकुरमुत्ते की तरह अवैध रूप से निजी अस्पताल खुल रहे है जो यमराज के रूप धारण किये हुए है। स्थानीय थाना क्षेत्र के कोन बाजार में स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत शनिवार की भोर में हो गयी जिसके बाद परिजनों नर जमकर हंगामा किया।  परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पुलिस, उपजिलाधिकारी तथा उपमुख्य चिकित्साधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कराई।

असपताल को सील करते स्वास्थ्य विभाग की टीम


बागेसोती ग्राम पंचायत के सिंगा गांव निवासी आशा कार्यकर्ता सीमा देवी (30) पत्नी देवनारायण को शुक्रवार देर रात प्रसव पीड़ा होने पर परिजन कचनरवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद एएनएम ने बताया कि महिला का प्रसव ऑपरेशन से होगा और तत्काल सर्जरी की आवश्यकता है। रात अधिक होने के कारण परिजनों ने इलाज की व्यवस्था के बारे में पूछा तो उन्हें कोन स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर भेज दिया गया। सरकारी एंबुलेंस से महिला को निजी अस्पताल पहुंचाया गया।

निजी अस्पताल के बाहर जुटी ग्रामीणों की भीड़


परिजनों के अनुसार अस्पताल में भर्ती करने के दौरान करीब 50 हजार रुपये जमा कराए गए और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। इसके बाद महिला का ऑपरेशन किया गया, जिससे एक पुत्र का जन्म हुआ। चार बेटियों के बाद पुत्र पैदा होने से परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। आरोप है कि बच्चे के जन्म के कुछ ही समय बाद महिला की मौत हो गई।


परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला की हालत बिगड़ने और मौत होने के बाद ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक अस्पताल छोड़कर फरार हो गए। इससे नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।

घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम ओबरा


सूचना मिलने पर थाना प्रभारी निरीक्षक अखिलेश मिश्रा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद उपजिलाधिकारी विवेक कुमार तथा उपमुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गणेश प्रसाद यादव भी अस्पताल पहुंचे और मामले की जानकारी ली।


उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. यादव ने बताया कि 20 मार्च को अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। उस समय अस्पताल संचालक अस्पताल बंद कर फरार हो गया था, जिसके बाद नोटिस चस्पा कर अस्पताल को सील कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल सील था तो वहां दोबारा इलाज और ऑपरेशन कैसे शुरू हुआ, यह गंभीर जांच का विषय है।


ग्रामीणों ने बताया कि लगभग एक वर्ष पूर्व भी इसी अस्पताल में कार्यरत एक कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उस मामले में भी मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने उस समय कर्मचारी द्वारा जहर खाने की बात कही थी।
मौके पर पहुंचे एसडीएम विवेक कुमार ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि क्षेत्र के अधिकांश निजी अस्पताल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते हैं। ऐसे अस्पतालों में किसी भी प्रकार का बड़ा ऑपरेशन नहीं किया जाएगा। यदि किसी अस्पताल द्वारा नियमों का उल्लंघन कर ऑपरेशन किए जाने की शिकायत मिली तो संबंधित संचालक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।


वही मौके पर पहुंचे ओबरा एसडीएम विवेक सिंह ने परिजनों को आश्वस्त किया कि उनकी तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।वही अस्पताल को सील कर दिया गया।

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