“विकास के नाम पर जनता को संकट में मत डालिए” : धर्मवीर तिवारी

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अमित मिश्रा

O- सोनभद्र में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण से 4 लाख आबादी पर असर, बिना वैकल्पिक रास्ते कार्य शुरू होने पर उठे सवाल

O- स्कूल के बच्चे, मरीज, किसान, व्यापारी और मजदूर होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज नगर स्थित रेलवे फाटक पर बनने जा रहे रेलवे ओवरब्रिज को लेकर जहां एक ओर लोगों में विकास कार्य को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर बिना वैकल्पिक व्यवस्था के रास्ता बंद किए जाने की तैयारी ने लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

रॉबर्ट्सगंज से खलियारी होते हुए बिहार को जोड़ने वाला स्टेट हाईवे-154 क्षेत्र की लगभग 4 लाख आबादी के लिए लाइफ लाइन माना जाता है। इस मार्ग से हजारों गांव सीधे जिला मुख्यालय से जुड़े हुए हैं। अब रेलवे विभाग द्वारा ओवरब्रिज और दोहरीकरण कार्य के चलते रेलवे फाटक के आसपास का मार्ग बंद किए जाने की तैयारी के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि विकास कार्य का स्वागत है, लेकिन बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लाखों लोगों की जीवनरेखा को बंद करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि रेलवे प्रशासन द्वारा न तो पहले से कोई व्यापक सूचना जारी की गई और न ही जनता के लिए वैकल्पिक रास्ते की स्पष्ट व्यवस्था की गई। इसका सबसे बड़ा असर स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, किसानों, व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ेगा।

डॉ. तिवारी ने कहा,

“जुलाई से स्कूल खुलेंगे। ऐसे में बच्चों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। आने-जाने में घंटों लगेंगे। रात में कोई मरीज गंभीर हो जाए तो एम्बुलेंस को लंबा रास्ता लेना पड़ेगा, जिससे जान का खतरा बढ़ सकता है।”

उन्होंने मांग की कि रेलवे विभाग पहले एडवाइजरी जारी करे और स्पष्ट बताए कि रास्ता कितने दिनों तक बंद रहेगा तथा जनता के लिए कौन-कौन सी वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

पूर्व जिलाध्यक्ष ने पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी चर्चित गौंड से बातचीत की। जिस पर जिलाधिकारी ने पैदल और बाइक सवार लोगों के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल सड़क नहीं बल्कि पूरे इलाके की आर्थिक और सामाजिक धड़कन है। किसान इसी रास्ते से अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाते हैं, व्यापारी रोजाना बाजार आते-जाते हैं, मजदूर शहर पहुंचकर रोजगार करते हैं और मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल तक पहुंचते हैं।

यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मार्ग बंद किया गया तो आम लोगों को 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे समय और पैसे दोनों का बोझ बढ़ेगा।

लोगों ने मांग की है कि जब तक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं हो जाता, तब तक मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद न किया जाए। साथ ही पैदल यात्रियों और बाइक सवारों के लिए तत्काल अस्थायी मार्ग बनाया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जनता की सुविधाओं को नजरअंदाज कर एकतरफा तरीके से मार्ग बंद किया गया तो यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।

संभावित प्रभाव:

  • स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
  • 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं में देरी
  • मरीजों को अस्पताल पहुंचने में संकट
  • किसानों और व्यापारियों की लागत बढ़ेगी
  • मजदूरों का समय और किराया दोनों बढ़ेगा
  • जिला मुख्यालय से लाखों लोगों का संपर्क प्रभावित

जनता की मांग:

  • बिना वैकल्पिक रास्ता तैयार किए कार्य शुरू न किया जाए
  • पैदल और बाइक सवारों के लिए अलग सुरक्षित मार्ग बनाया जाए
  • रेलवे और प्रशासन संयुक्त एडवाइजरी जारी करें
  • एम्बुलेंस और स्कूल वाहनों के लिए विशेष व्यवस्था हो
  • जनता से संवाद कर चरणबद्ध तरीके से कार्य कराया जाए

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