अजीत सिंह
निजी प्रकाशकों की याचिका को किया गया खारिज
प्रयागराज(उत्तर प्रदेश)। प्रयागराज से बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP बोर्ड) को एक महत्वपूर्ण अधिकार देते हुए साफ कर दिया है कि बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में केवल बोर्ड द्वारा स्वीकृत किताबें ही पढ़ाई जाएंगी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद शामिल हैं, ने इस संबंध में दाखिल सभी याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद को यह पूर्ण अधिकार है कि वह अपने अधीन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम और पाठ्य पुस्तकों का निर्धारण करे। बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में अब केवल स्वीकृत पुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी।
इस मामले में कई निजी प्रकाशकों ने याचिकाएं दाखिल की थीं, जिनमें बोर्ड के इस फैसले को चुनौती दी गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने प्रकाशकों की सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए बोर्ड के निर्णय को वैध ठहराया।
क्या बदलेगा इस फैसले से?
UP बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में अनधिकृत किताबों पर रोक
छात्रों को एक समान और मानक पाठ्य सामग्री
शिक्षा व्यवस्था में मनमानी और भ्रम पर लगाम
हाईकोर्ट के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।







