नारी शक्ति वंदन अधिनियम से बदलेगी देश की राजनीति की तस्वीर:डॉ. दीप्ति सिंह

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O कलेक्ट्रेट में प्रेस वार्ता, 33% महिला आरक्षण को बताया ऐतिहासिक कदम

सोनभद्र। देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई ताकत देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब चर्चा के केंद्र में है। शुक्रवार को सोनभद्र कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में इस कानून को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि लोकसभा, विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद देश की राजनीति की तस्वीर बदल जाएगी।
प्रेस वार्ता की अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति सिंह और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता जायसवाल ने की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक बड़ा और दूरगामी प्रभाव वाला कानून है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की राजनीति और नीति निर्धारण में भागीदारी को मजबूत करना है।
डॉ. दीप्ति सिंह ने कहा कि अधिनियम के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित किए जाने का प्रावधान है। इसे राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया गया कि महिला आरक्षण लागू होने से पहले देश में जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। परिसीमन के बाद ही आरक्षण व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो सकेगी।
डॉ. गीता जायसवाल ने जानकारी दी कि महिलाओं के लिए यह आरक्षण प्रारंभिक तौर पर 15 वर्षों तक लागू रहेगा। हर परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों का रोटेशन किया जाएगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके। अधिनियम में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान है। एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटों में से एक-तिहाई सीटें संबंधित वर्ग की महिलाओं के लिए सुरक्षित रहेंगी। वहीं ओबीसी महिलाओं के लिए उप-कोटा को लेकर चर्चा अभी जारी है।
विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान में संसद में महिलाओं की भागीदारी करीब 15 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन इस कानून के लागू होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 33 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इससे न केवल महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूती मिलेगी, बल्कि देश में अधिक समावेशी और संतुलित शासन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस मौके पर नमिता शरण, सरिता सिंह, विद्या देवी, इन्द्रावती देवी, दीपिका सिंह और साधना मिश्रा समेत कई महिला अधिकारी और कार्मिक मौजूद रहीं। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह अधिनियम विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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