मनरेगा से छेड़छाड़ के खिलाफ देशव्यापी आक्रोश, 22 दिसंबर को वामपंथी दलों का विरोध प्रदर्शन

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सी एस पाण्डेय

O- सोनभद्र में वामपंथी दलों का जिलाधिकारी कार्यालय पर बड़ा विरोध प्रदर्शन

बभनी (सोनभद्र)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मूल स्वरूप में बदलाव और उसके स्थान पर नए कानून को लाने की केंद्र सरकार की कोशिशों के खिलाफ वामपंथी दलों ने देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इसी क्रम में 22 दिसंबर को सोनभद्र जिले में वामपंथी दलों के कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पर विशाल विरोध प्रदर्शन करेंगे।

वामपंथी दलों का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मनरेगा जैसे सार्वभौमिक और मांग-आधारित कानून को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में वामपंथी दलों के दबाव में लागू हुआ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा साबित हुआ है, लेकिन अब इसे समाप्त कर विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 (VB-GRAMJ Bill) लाने की कोशिश की जा रही है।

वामपंथी नेताओं के अनुसार, नया विधेयक मनरेगा के उस बुनियादी सिद्धांत को खत्म करता है जिसमें काम मांगने पर रोज़गार देना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी थी। यह विधेयक न केवल मांग-आधारित रोज़गार की गारंटी खत्म करता है, बल्कि केंद्र सरकार को पर्याप्त फंड देने की जिम्मेदारी से भी मुक्त कर देता है।

नेताओं ने सरकार के 100 से 125 दिन तक गारंटीशुदा रोज़गार देने के दावे को “जुमला” करार देते हुए कहा कि जॉब कार्ड के तथाकथित तर्कसंगतीकरण से लाखों ग्रामीण परिवार योजना से बाहर हो जाएंगे। खेती के चरम मौसम में 60 दिनों तक रोज़गार निलंबन का प्रावधान ग्रामीण मज़दूरों को सबसे ज़रूरी समय में बेरोज़गार कर देगा और उन्हें फिर से ज़मींदारों पर निर्भर होने के लिए मजबूर करेगा।

डिजिटल हाज़िरी को अनिवार्य करने पर भी वामपंथी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि इससे मज़दूरों का काम छूट रहा है और वे अपने कानूनी अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। साथ ही फंडिंग पैटर्न बदलकर केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी राज्यों पर डाल रही है, जिससे राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।

वामपंथी दलों ने मनरेगा का नाम बदलकर “जी-राम-जी” किए जाने के प्रस्ताव को महात्मा गांधी की विरासत का अपमान बताया और इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व भाजपा की गांधी-विरोधी सोच का प्रतीक करार दिया।

इस संबंध में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के जिला सह सचिव देव कुमार विश्वकर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि दुद्धी, म्योरपुर और बभनी से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता 22 दिसंबर को जिलाधिकारी कार्यालय सोनभद्र पहुंचेंगे। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस आंदोलन में शामिल होकर सरकार से VB-GRAMJ विधेयक को तुरंत वापस लेने और मनरेगा को मजबूत करने की मांग करें।

वामपंथी दलों की मांग है कि मनरेगा को और अधिक सार्वभौमिक बनाया जाए, पर्याप्त बजट आवंटन हो और न्यूनतम 200 दिनों के गारंटीशुदा रोज़गार को कानूनी रूप दिया जाए, ताकि ग्रामीण भारत को बेरोज़गारी और गरीबी से बचाया जा सके।

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