विकास से कोसों दूर है सोनभद्र का ‘जुगैल’, 50 हजार की आबादी आज भी तरस रही है मूलभूत सुविधाओं के लिए

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अमित मिश्रा

O- ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन

सोनभद्र । उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार जुगैल आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
करीब 50 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र के लोग अब भी सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और नेटवर्क जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इसी को लेकर सोमवार को दर्जनों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम डीएम प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अपना दल (एस) शिक्षा प्रकोष्ठ के पूर्व जिला अध्यक्ष राहुल पांडेय ने कहा कि जुगैल आज भी “विकास से नहीं, बदहाली से जुड़ा नाम” बन गया है।
यहाँ एंबुलेंस बुलाने के लिए लोगों को पहाड़ों पर चढ़कर नेटवर्क खोजना पड़ता है।
कई बार डॉक्टर या ड्राइवर तक से संपर्क न हो पाने की वजह से गंभीर मरीजों को 70 से 100 किलोमीटर दूर वाराणसी या रॉबर्ट्सगंज तक खुद के साधनों से ले जाना पड़ता है।
“कई गर्भवती महिलाओं की मौत केवल समय पर इलाज न मिलने की वजह से हो चुकी है।” — राहुल पांडेय ने कहा।

उन्होंने बताया कि यहाँ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर तो हैं, लेकिन सेवा नेटवर्क और एम्बुलेंस की अनुपलब्धता से पूरी तरह ठप पड़ी है।
मोबाइल नेटवर्क की कमी ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया है, बल्कि शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था को भी पंगु बना दिया है।

शिक्षा व्यवस्था चरमराई:
जुगैल की बेटियों को स्नातक की पढ़ाई के लिए दूसरे कस्बों का रुख करना पड़ता है क्योंकि क्षेत्र में इंटर कॉलेज या डिग्री कॉलेज तक नहीं है।
नेटवर्क न होने से ऑनलाइन क्लास, छात्रवृत्ति पोर्टल और डिजिटल शिक्षा ठप हैं।
बच्चे डिजिटल इंडिया की दौड़ से बाहर हैं।

सुरक्षा और प्रशासन पर असर:
अपराध या किसी आपात घटना की सूचना देने के लिए लोगों को 5–6 किलोमीटर दूर पहाड़ों पर जाकर फोन मिलाना पड़ता है।
बरसात या रात के समय यह काम जान जोखिम में डालने जैसा होता है।
अक्सर चोरी, झगड़े और आगजनी की घटनाएँ समय पर पुलिस तक नहीं पहुँच पातीं।

सरकारी योजनाएँ भी ठप:
बैंकिंग, राशन कार्ड, मनरेगा हाजिरी और आयुष्मान कार्ड जैसी योजनाएँ नेटवर्क पर निर्भर हैं, लेकिन नेटवर्क न होने से ग्रामीण लाभ से वंचित हैं।
यहाँ तक कि हर घर नल योजना भी नेटवर्क फेल होने के कारण प्रभावित है।
जल निगम के मॉनिटरिंग सिस्टम तक डाटा नहीं पहुँच पाता, जिससे योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है।

औद्योगिक विकास का कोई लाभ नहीं:
क्षेत्र में हिंडाल्को और एनटीपीसी जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ संचालित हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार और सुविधाएँ नहीं मिल पाईं।
ग्रामीणों के अनुसार, “सुविधाएँ बाहरी लोगों को और प्रदूषण हमारे हिस्से में आ रहा है।”

राहुल पांडेय ने कहा,

जुगैल आज भी 21वीं सदी में ‘काला पानी’ जैसा बन गया है।
अब वक्त है कि इसे विकास की धरती बनाया जाए, ताकि यहाँ के लोग भी सम्मानजनक जीवन जी सकें।

इस अवसर पर राम जीवन, रमेश, धर्मदेव, बाबूराम, उमाशंकर, लालता सिंह, ददई और हीरामणि समेत कई ग्रामीण उपस्थित रहे।

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