नवीन कुमार
सन 1836 में बने धरोहर को नया स्वरूप देने की तैयारी
कोन (सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका पुरानी पोखरा स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर अब नए रूप में नजर आएगा। 1836 में निर्मित यह मंदिर अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। दीवारों और छतों में आई दरारों को देखते हुए मंगलवार को शिव मंदिर समिति ने सर्वसम्मति से इसका पुनर्निर्माण करने का निर्णय लिया।
यह मंदिर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुजरते हैं। धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्त्व को देखते हुए मंदिर को वास्तुशास्त्र और परंपराओं के अनुरूप नए रूप में बनाया जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय मंगलवार को आयोजित बैठक में समिति के सदस्य, समाजसेवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
बैठक में तय किया गया कि मंदिर का निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा।निर्माण में पारंपरिक शैली के साथ आधुनिक मजबूती को जोड़ा जाएगा।परिसर में जल, विश्राम व छाया जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।दान संग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और सभी सहयोगकर्ताओं का सार्वजनिक रजिस्टर तैयार किया जाएगा। शिव मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं, व्यापारियों और समाजसेवियों से तन-मन-धन से सहयोग करने की अपील की है। यह सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था और विरासत को सहेजने का अभियान है।
बैठक का समापन “हर हर महादेव” के जयकारों के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने विश्वास जताया कि नया मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगा।
इस बैठक में मुख्य रूप से लक्ष्मी कुमार,विजय शंकर,पीयूष कुमार,अरुण कुमार,अजय कुमार,अशोक निराला,अंसुल, जगरनाथ पासवान,महंगू राम,आदि सैकड़ो लोग मौजूद रहे







