अमित मिश्रा
O- सरकारी धन का बंदरबांट, जनता परेशान ग्रामीणों ने सीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग
सोनभद्र। चतरा विकास खण्ड के ग्राम पंचायत चपईल के रहवासी इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। टूटी-फूटी गलियों और जल संकट ने ग्रामीणों का जीवन मुहाल कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि बीते तीन वर्षों से लगातार ग्रामीण अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से समस्या के समाधान की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कोई असर नहीं पड़ा।
ग्राम पंचायत चपईल निवासी अभय सिंह पटेल ने बताया कि वर्ष 2022 में ही गांव की जर्जर गलियों के पुनरुद्धार और गांव में बनी पानी की टंकी से नियमित पेयजल आपूर्ति के लिए विकास खण्ड अधिकारी को पत्र सौंपा गया था। इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वर्ष 2024 में उन्होंने दोबारा नए विकास खंड अधिकारी से मिलकर हालात से अवगत कराया, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
शिकायतकर्ता ने बताया कि 2022 में मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई थी, जिस पर पंचायत सचिव ने जवाब दिया कि बजट नहीं है, बजट आने पर कार्य कराया जाएगा। लेकिन आज तक न गलियां बनीं और न ही पानी की समस्या का समाधान हुआ। जब 2025 में फिर से मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई तो सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर दी गई, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।
गांव में व्यक्तिगत काम, सार्वजनिक विकास ठप
अभय सिंह का आरोप है कि पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान केवल निजी हितों के काम करा रहे हैं। गांव में एक व्यक्ति के घर के अंदर इंटरलॉकिंग सड़क बनाई जा रही है, लेकिन पूरी पंचायत की जर्जर गलियों के लिए पैसे नहीं हैं। वहीं, पेयजल टंकी होने के बावजूद लोग पानी के लिए दूर-दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
फर्जी बिलिंग पर सवाल, सीएम से न्याय की गुहार
गांव में हर महीने सरकारी योजनाओं के नाम पर बिल तैयार हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर काम नहीं दिख रहा। अभय सिंह ने मुख्यमंत्री से ट्वीट कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो असलियत सामने आ जाएगी। जनता विकास के नाम पर सिर्फ वादे और भ्रष्टाचार देख रही है।







