अमित मिश्रा
सोनभद्र। बरैला महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित अभिषेकात्मक रुद्र महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञान महायज्ञ के छठवें दिन श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। यज्ञाचार्य पंडित सौरभ भारद्वाज ने भगवान शिव के अभिषेक के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा,
“सूनू जननी सोई सूत बड़भागी, जो पितच मातु चरण अनुरागी।”
अर्थात् जो संतान माता-पिता के वचनों का पालन करती है, वही वास्तव में भाग्यशाली है।
सुबह 8 बजे से शिव अभिषेक के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें भक्त राज हेमंत गुप्ता एवं कृपा शंकर पांडे सुनिए रामकथा, जानिए जीवन का सार – बरैला महादेव में रुद्र महायज्ञ का छठा दिवस ने महादेव का दिव्य श्रृंगार किया। यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते श्रद्धालुओं ने आस्था की पराकाष्ठा दिखाई। पंडित भारद्वाज ने रामेश्वरम के प्रसंग को स्मरण कराते हुए कहा कि जैसे प्रभु श्रीराम ने रावण पर विजय पाने से पहले शिवलिंग की स्थापना कर रुद्राभिषेक किया, वैसे ही प्रत्येक मनुष्य के जीवन में अभिषेक की महत्ता है।

उन्होंने कहा, “वेद मंत्रों की ध्वनि में इतनी शक्ति होती है कि वह कैंसर जैसी बीमारियों को भी दूर कर सकती है।” उन्होंने यह भी बताया कि बरैला महादेव मंदिर में अब तक जिन लोगों ने महामृत्युंजय जाप कराया है, वे सुखी और सफल जीवन जी रहे हैं।
रात्रिकालीन श्रीराम कथा में मानस गंगा प्रियंका पांडे ने श्रीराम के वनगमन की मार्मिक कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि राम कथा का श्रवण मानव जीवन को दिशा देता है और प्रभु के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय वक्ता व सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित बाल गोविंद शास्त्री महाराज ने केवट प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा,
“मांगी नाव न केवट आना, कहई तोहार मरम मैं जाना।”
केवट का समर्पण भाव और भगवान राम के चरणों की सेवा भावना को शास्त्री जी ने भावुक कर देने वाले शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि केवट प्रभु के चरण धोने वाले दूसरे पात्र थे, पहले थे राजा जनक।
कार्यक्रम में श्रृंगार आरती का आयोजन संदीप कुमार त्रिपाठी, अनीता गुप्ता और त्रिपाठी ब्रदर्स द्वारा किया गया।
इस पावन अवसर पर बरैला महादेव सेवा ट्रस्ट के प्रबंधक साधना चतुर्वेदी, लक्ष्मी सिंह, रवि प्रकाश पांडे, संतोष पांडे, बुद्धिनाथ तिवारी, रामविलास पांडे, अरविंद शरण सिंह, लकी सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।






