अध्यात्म से एक डाकू भी बन सकता है वाल्मीकि : अजीत रावत

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अमित मिश्रा

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज नगर स्थित विवेकानंद प्रेक्षा गृह परिसर में गुरुवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर मनाई गई।
वही मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अनुसूचित मोर्चा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष अजीत रावत व विशिष्ट अतिथि भाजपा जिला महामंत्री कृष्ण मुरारी गुप्ता के नेतृत्व में चित्र पर माल अर्पण कर पुष्प अर्पित करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला गया।
सदर ब्लाक प्रमुख अजीत रावत ने बताया कि
एक हिंदू धार्मिक त्योहार है, जो महर्षि वाल्मीकि की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो एक प्रभावशाली हिंदू विद्वान और ऋषि थे, जिन्होंने हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में से एक रामायण लिखी थी।
वही वाल्मीकि जयंती को महर्षि वाल्मीकि की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो अब तक के सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय महाकाव्यों में से एक रामायण के रचयिता हैं। आदि कवि या संस्कृत भाषा के पहले कवि के रूप में प्रतिष्ठित, ऋषि नारद मुनि से मिलने और ‘मरा’ (मरना) शब्द का जाप करने के बाद, उन्होंने एक बड़ा परिवर्तन किया, जिसे कई बार दोहराने पर ‘राम’ बन गया, जो महान आध्यात्मिक महत्व वाला शब्द है और भगवान विष्णु के अवतारों में से एक का नाम है। महर्षि वाल्मीकि की जयंती हर साल हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार अश्विन पूर्णिमा को मनाई जाती है। श्री रावत ने बताया कि वाल्मीकि का जन्म रत्नाकर के रूप में हुआ था और वह एक डाकू था जो लोगों को लूटता था और उन्हें मार डालता था। नारद मुनि से उनकी मुलाकात ने उनके जीवन को बदल दिया क्योंकि उन्होंने उन्हें राम शब्द का जाप करने की सलाह दी। हालांकि, रत्नाकर कई प्रयासों के बाद भी खुद को राम शब्द का जाप करने के लिए तैयार नहीं कर पाए, इसलिए नारद ने उन्हें ‘मरा’ कहने के लिए कहा, जो हिंदी में उल्टा राम है। इस मौके पर आलोक रावत,अभिषेक गुप्ता,अमन वर्मा आदि लोग मौजूद रहे।

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