भवन होने के बाद भी नहीं हो रही पढ़ाई, आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
म्योरपुर (सोनभद्र)। स्थानीय ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कुलडोमरी के बरोहिया प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की तैनाती नहीं होने से स्कूल वीरान पड़ा है। विद्यालय भवन होने के बावजूद यहां पढ़ाई नहीं हो रही है। जंगलों के बीच बसे खरवार आदिवासी बाहुल्य इस गांव में शिक्षा की बदहाल तस्वीर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। गांव तक पहुंचने के लिए टूटी सड़कें, बिजली की समस्या और बुनियादी सुविधाओं का अभाव पहले से ही ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है। ऐसे में करीब पांच किलोमीटर के दायरे में जंगलों के बीच बसे गांव के बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर मुख्य सड़क के किनारे स्थित विद्यालयों में पांच-पांच शिक्षक तैनात हैं, वहीं दूसरी ओर जहां आदिवासी बच्चों को शिक्षा की सबसे अधिक जरूरत है, वहां एक भी शिक्षक नहीं है। विंध्याचल, धनेसरी, सुखमनिया और सोमारी सहित आसपास के ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ ऐसा भेदभाव क्यों हो रहा है? क्या यह शिक्षा से वंचित रखने की सोची-समझी चाल है या विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही? ग्रामीणों ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए जरूरी हैं, फिर हमारे बच्चों को इन बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों रखा जा रहा है? विद्यालय में तत्काल शिक्षक की तैनाती कर पढ़ाई शुरू कराने की मांग की है।
मामले को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार ने सेल फोन पर बताया कि बरोहिया विद्यालय शिक्षक विहीन है। वहां कोई शिक्षक की तैनाती नहीं है।









