जल-जंगल-जमीन की आवाज बने जगतनारायण विश्वकर्मा

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

IIT कानपुर ने गोवा वार्षिक कार्यक्रम के लिए किया आमंत्रित

म्योरपुर, सोनभद्र। खनिज संपदा से समृद्ध सोनभद्र में पर्यावरण संरक्षण और लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जगतनारायण विश्वकर्मा को आईआईटी कानपुर ने अपने वार्षिक सम्मेलन के लिए वक्ता के रूप में आमंत्रित किया है। यह कार्यक्रम 26 और 27 अक्टूबर को गोवा इंटरनेशनल में आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश के शोध छात्र, प्रोफेसर, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल होंगे।
पिछले कई वर्षों से जल, जंगल और जमीन के मुद्दे को जनआंदोलन से जोड़ने वाले विश्वकर्मा का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं जो आने वाली पीढ़ियों को प्रदूषित पानी, हवा और उजड़ते जंगलों के रूप में कीमत चुकाने पर मजबूर करे।
सोनभद्र में अवैध खनन, प्रदूषण, रिहंद, कनहर, सोन और रेणुका नदियों को बचाने के मुद्दों को उन्होंने स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। वर्ष 2014 में एनजीटी में दायर मामले ने उन्हें कानूनी लड़ाई में पहचान दिलाई।

हर घर शुद्ध जल से पर्दे तक पहुंची पीड़ा

सोनभद्र -सिंगरौली क्षेत्र के प्रदूषण पर निर्माता सुरेंद्र सिंह की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘हर घर शुद्ध जल’ में भी विश्वकर्मा का सहयोग रहा, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
विश्वकर्मा का कहना है- “जल है तो जंगल है, जंगल है तो जमीन है और इन तीनों के सुरक्षित रहने से ही गांव और आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी।”
बलियानाला में दुद्धी चुआ कोल माइंस द्वारा छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी के मुद्दे को भी उन्होंने एनजीटी टीम को बुलाकर उठाया था। तीन दशक से अधिक समय से सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी और बनवासी सेवा आश्रम से जुड़कर वे पर्यावरण संरक्षण के लिए संघर्षरत हैं।
उनके आमंत्रण पर सामाजिक कार्यकर्ताओं प्रशांत दुबे, पंकज सिंह, अजीत कुमार, विकास अग्रहरि, अशोक दुबे, बाबूलाल शर्मा, संतोष दयाल ने खुशी जाहिर की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1
वोट करें
  1. सोनभद्र के चार विधानसभा में कौन सा दल आगे चल रहा है ।