शिकायत के बाद सचिव व अध्यक्ष ने दोनों किसानों को दी नोटिस, जांच में जुटी सहकारिता विभाग
केकराही। बी-पैक्स सहकारी समिति केकराही करमा समिति से करमा थाना क्षेत्र के दो किसान जो पिता एवं पुत्र हैं, दोनों द्वारा कूटरचित एवं फर्जी खतौनी तैयार कर समिति से ऋण प्राप्त कर लिए जाने का आरोप लगा है, जिसकी शिकायत होते ही विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
समिति के अध्यक्ष एवं सचिव के मुताबिक कुचमरवा गांव निवासी रामेश्वर दत्त मिश्र एवं उनके बेटे वैभव मिश्र द्वारा जमा की गई खतौनी ग्राम कुचमरवा में दर्शाए गए गाटा सं. 113 मि खाता सं. 00065 की पुष्टि ऑनलाइन नहीं हो पा रही है। जो खतौनी जमा की गई है, वह 1.090 हे. है, जबकि ऑनलाइन देखने पर केवल 0.0900 ही दिखाई दे रही है। इसी तरह कसया खुर्द गांव की चकबंदी विभाग की हस्तलिखित खतौनी खाता सं. 30 और गाटा सं. 21, 127, रकबा 1.3380 जो लगाई गई है, वह भी फर्जी प्रतीत हो रही है।
इस संबंध में सचिव धीरज त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत के बाद जांच करने पर जमा की गई खतौनी ऑनलाइन चेक की गई तो फर्जी निकली है। सचिव ने बताया कि ऐसा कृत्य करने वाले कुचमरवा गांव के दोनों किसानों को नोटिस जारी कर उनसे तहसीलदार द्वारा प्रमाणित खतौनी गाटा सं. 113 मि खाता सं. 00065 व खाता सं. 30 और गाटा सं. 21, 127, रकबा 1.3380 ग्राम कुचमरवा की मांगी गई है। उन्होंने बताया कि खतौनी जांच करने पर प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत हो रही है। समयानुसार स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर फर्जी फ्रॉड करने वाले दोनों किसानों के खिलाफ सरकारी धन का गबन एवं कूटरचित प्रपत्र जमा करने तथा समिति के साथ जालसाजी एवं धोखा करने के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में सहायक आयुक्त / सहायक निबंधक सहकारिता संजय वर्मा ने बताया कि उक्त प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है। शिकायत की जांच कराई जा रही है, दोषी किसानों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। मजे की बात यह है कि सहकारी समिति से कृषक ऋण के लिए लगाई गई खतौनी की जांच किए बिना सरकारी धन ऋण वितरण में जांच का विषय है, जबकि सरकारी ऋण के लिए आवश्यक प्रपत्रों की जांच एवं दो किसानों की गवाही के बाद ही धनराशि जारी की जाती है।
सूत्रों की मानें तो अभी मात्र दो किसानों के फर्जी फ्रॉड का मामला संज्ञान में आया है, जांच के बाद ही पता चलेगा कि कितने लोगों को सरकारी धन की बंदरबांट की गई है। देखना यह होगा कि सरकारी धन के गबन एवं फर्जी फ्रॉड करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होता है या ठंडे बस्ते में डाल कागजी कार्रवाई तक सिमट कर रह जाता है।









