“जल जंगल जमीन बचाओ” को लेकर भाकपा समर्थित आदिवासी महासभा का चोपन में कार्यकर्ता सम्मेलन

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1 सितंबर को जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय आंदोलन की रणनीति तय

सोनभद्र । अखिल भारतीय आदिवासी महासभा, उत्तर प्रदेश की ओर से रविवार को चोपन बैरियर स्थित एक मैरिज हॉल में एक दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का नेतृत्व आर. के. शर्मा ने कहा
सम्मेलन में सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली के अलावा मध्य प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में नवगठित संगठनात्मक टीम का स्वागत एवं सम्मान किया गया तथा संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने का संकल्प
सम्मेलन में 1 सितंबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित राष्ट्रीय आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन जल, जंगल, जमीन, वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, पेसा कानून के पालन, आदिवासी धर्म को अलग पहचान तथा आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर किया जाएगा।

“पेसा कानून की अनदेखी हो रही” – सुखलाल गोरे

अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव सुखलाल गोरे ने कहा कि संगठन पूरे देश में आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने का अभियान चला रहा है।
उन्होंने कहा कि “पेसा कानून के तहत ग्राम सभा सर्वोच्च इकाई है। उसकी अनुमति के बिना आदिवासी क्षेत्रों की भूमि, जल, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े किसी भी निर्णय का अधिकार सरकार या प्रशासन को नहीं है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में ग्राम सभाओं के अधिकारों की अनदेखी कर कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता, बंधुआ मजदूरी की रोकथाम तथा समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।

“आदिवासी संस्कृति और पहचान पर हमले” – समर शास्त्री

राष्ट्रीय सदस्य समर शास्त्री ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, धर्म और पहचान पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने आदिवासी धर्म के लिए अलग धर्म कोड लागू करने की मांग की। कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का उपासक है और उसकी आस्था जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है।
उन्होंने पेसा एक्ट और वन अधिकार अधिनियम का पूरी तरह पालन कर पात्र आदिवासी परिवारों को उनके अधिकार दिए जाने की मांग की।

“स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिले” – संजय नामदेव

भाकपा (मध्य प्रदेश) के राज्य समिति सदस्य संजय नामदेव ने कहा कि सोनभद्र और सिंगरौली जैसे संसाधन संपन्न क्षेत्रों का प्राकृतिक दोहन तो हो रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों को उसका लाभ नहीं मिल रहा।
उन्होंने स्थानीय युवाओं को उद्योगों और परियोजनाओं में प्राथमिकता से रोजगार, प्रदूषण रोकने, जंगलों की कटाई पर नियंत्रण तथा स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही आदिवासी भूमि की सुरक्षा, जनगणना में सही गणना, सरकारी स्कूलों को सुदृढ़ करने और प्रवासी मजदूरों को न्याय व मुआवजा दिलाने की बात उठाई।
कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि डॉक्टर बनकर देश की सेवा का सपना देखने वाले कई छात्र इन घटनाओं से मानसिक रूप से आहत हुए हैं। ऐसे छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
संकल्प
सम्मेलन के अंत में वक्ताओं ने सभी कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर लोगों को अधिकारों के प्रति जागरूक करने, संगठन को मजबूत बनाने तथा 1 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया। मौजूद कार्यकर्ताओं ने जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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