वन विभाग में बाल श्रम का आरोप: पौध संरक्षण कार्य में नाबालिग बच्चों से कराया जा रहा था काम, जांच शुरू

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सी एस पाण्डेय

बभनी/म्योरपुर (सोनभद्र)। सोनभद्र जिले के म्योरपुर वन क्षेत्र अंतर्गत नधिरा-किरविल जंगल क्षेत्र में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की सुरक्षा और निराई-गुड़ाई के कार्य में नाबालिग बच्चों से काम कराने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर श्रम विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है।

जानकारी के अनुसार शनिवार शाम को विश्व हिंदू परिषद के प्रखण्ड संयोजक एवं बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षित दुबे को सूचना मिली कि वन विभाग के संरक्षण कार्यों में छोटे-छोटे बच्चों को लगाया गया है। इसके बाद उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की।

सूचना पर पहुंची विभागीय टीम ने मौके पर कई बच्चों को कार्य करते हुए पाया। बच्चों ने बताया कि वे बभनी थाना क्षेत्र के सहगोडा गांव के निवासी हैं और सुबह लगभग 8 बजे से शाम 5 बजे तक पौधों की निराई-गुड़ाई एवं संरक्षण कार्य में लगे रहते हैं। मौके पर मिले बच्चों में 10 वर्षीय नीरज कुमार गोंड, 12 वर्षीय महेश कुमार गोंड, 11 वर्षीय संजय कुमार गोंड, 12 वर्षीय संदीप गोंड, 13 वर्षीय रविन्द्र गोंड तथा 12 वर्षीय दिलबरन शामिल बताए गए हैं। सभी बच्चे विद्यालय में अध्ययनरत हैं।

मामले की सूचना मिलने के बाद श्रम विभाग की टीम ने बच्चों को उनके घर पहुंचाया और परिजनों से बातचीत कर पूरी जानकारी एकत्र की। जांच के दौरान वन क्षेत्राधिकारी जबर सिंह, वन दरोगा शिव मंगल सहित विभागीय कर्मचारी भी मौजूद रहे।

विहिप प्रखण्ड संयोजक हर्षित दुबे ने इसे बाल श्रम कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि सरकारी विभाग द्वारा पढ़ने वाले बच्चों से मजदूरी कराना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

उधर, श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि मामले की सूचना प्राप्त हो चुकी है। सोमवार को संबंधित किशोरों का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा, जिसके बाद उनकी वास्तविक आयु का निर्धारण होगा। यदि जांच में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कार्य कराए जाने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

वन क्षेत्राधिकारी म्योरपुर जबर सिंह ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। बच्चों की आयु एवं परिस्थितियों की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी परियोजनाओं में ही बाल श्रम के नियमों की अनदेखी होगी तो बाल संरक्षण कानूनों का पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

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