रासलीला के आठवें दिन हुआ सुदामा चरित्र का मार्मिक मंचन

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अमित मिश्रा

श्री कृष्ण रासलीला में सुदामा चरित्र का मंचन देख भक्त हुए मंत्रमुग्ध , द्वारकाधीश की हुई दिव्य आरती

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में रासलीला समिति सोनभद्र नगर द्वारा रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय रासलीला के आठवें दिन कलाकारों ने महारास के साथ भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का नृत्य के माध्यम से बड़ा ही मार्मिक मंचन किया गया।


वृंदावन के कलाकारों द्वारा लीला के अंतर्गत बाल्यकाल में सुदामा जी उज्जैन नगरी स्थित शांति वन गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण के लिए जा रहे थे। रास्ते में उनके पैर में कांटा गड़ गया। इस पर वे दर्द से चीखने चिल्लाने लगे। उसी रास्ते से होकर भगवान श्रीकृष्ण भी गुरुकुल शिक्षा ग्रहण करने जा रहे थे। सुदामा को मुसीबत में देख उन्होंने उनके पांव से कांटा निकाला और जड़ी बूटी लगाई। इस घटना के बाद दोनों मित्र बन गए।

गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण के दौरान सुदामा अपना पाठ भूल गए। गुरु द्वारा पूछे जाने के बाद उन्होंने पाठ नहीं सुनाया। इस पर गुरु ने उन्हें जंगल जाकर लकड़ी लाने को कहा। मित्र को मुसीबत में देख भगवान भी अपने याद किए पाठ को भूलने का नाटक कर बैठे। इस पर क्रोधित गुरु ने उन्हें भी सुदामा के साथ जंगल से लकड़ी लाने का आदेश दिया। भूख लगने पर खाने के लिए सुदामा को दो मुट्ठी चने दिए। जंगल में कृष्ण लकड़ियां लाने चले गए। उसी समय सुदामा को भूख लगी और उन्होंने पूरा चना खा लिया। लकड़ी लेकर लौटे कृष्ण ने भूख लगने पर सुदामा से चने मांगे तो सुदामा ने सच सच बता दिया।

इस पर भगवान ने उन्हें श्राप दिया कि ‘हक पराया खाय के, यही मिलेगी सीख, हो दरिद्री आज से, दर दर मांगे भीख।’ पढ़ाई पूरी करने के बाद श्रीकृष्ण मथुरा के राजा बन गए और सुदामा भिखारी। फिर एक समय आया कि सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे और उनके पास  देने के लिए कुछ नहीं था तो वे अपने साथ कच्चा चावल ले गए। सुदामा को देख श्रीकृष्ण अति प्रसन्न हुए। उन्होंने सुदामा के लाए चावल खाने शुरू किए। एक मुट्ठी खाकर एक तथा दूसरी मुट्ठी चावल खाकर जब उन्होंने सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया। जब वे तीसरी मुट्ठी चावल खाने लगे तो वहां खड़ी रुक्मिणी ने उन्हें रोककर कहा कि तीनों लोक सुदामा को दे देंगे तो स्वयं कहां रहेंगे प्रभु। इस पर श्रीकृष्ण ने अपने हाथ रोक लिए और सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया।
आठवें दिन के रासलीला का समापन द्वारकाधीश की दिव्य आरती के साथ हुई।


इस अवसर पर समति के जितेन्द्र सिंह, रामप्रसाद यादव, कृष्ण मुरारी, पवन जैन, अशोक श्रीवास्तव, प्रमोद गुप्ता, राकेश गुप्ता, सचिन गुप्ता, धीरज जालान, सत्येन्द्र पांडे, संदीप चौरसिया, डॉ. अशोक, डॉ. चन्द्र भूषण देव, उमेश केशरी, मनीष सोनकर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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