आर्थिक रूप से कमजोर व अनाथ बच्चो को वरदान साबित हो रही स्पॉन्सरशिप योजना

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अमित मिश्रा

हर बच्चा – मेरा बच्चा” के भाव के साथ लोगों ”को समझनी होगी जिम्मेदारीः शेषमणि दुबे

सोनभद्र:। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश पर जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाईल्ड हेल्पलाइन यूनिट के संयुक्त टीम द्वारा नगवां ब्लाक के वैनी बाजार, खलियारी बाजार सहित विभिन्न स्थानो पर बाल भिक्षा वृत्ति एवं सड़क के किनारे कुडा करकट उठाने वाले बच्चो के चिन्हाकन और पुनर्वासन के लिए विशेष अभियान चलाया गया, जिसमे चार बच्चो का चिन्हाकन कर परिवार मे पुनर्वासित करवाते हुए स्पान्सरशिप योजना से लाभान्वित कराये जाने हेतु टीम द्वारा बताया गया।

जिला बाल संरक्षण इकाई के ओआरडब्ल्यू शेषमणि दुबे द्वारा बताया गया की अनाथ या आर्थिक रूप से कमजोर एकल अभिभावक वाले बच्चों को भी अब सामान्य बच्चों जैसा भविष्य संवारने का उचित अवसर “स्पॉन्सरशिप योजना” शुरू है। जनपद में 101 जरूरतमंद बच्चों को इस योजना के तहत लाभ दिया जा रहा है। इस योजना के तहत 1 से 18 साल तक के वह बच्चे पात्र होंगे, जिनके पिता की मृत्यु हो गई या, मां तलाकशुदा हैं, या परिवार से बहार निकाले गए हैं। माता-पिता या उनमें से कोई गंभीर, जानलेवा रोग से ग्रसित है. बेघर, अनाथ या विस्तारित परिवार के साथ रहने वाले बच्चे भी इसके पात्र होंगे। इसके अलावा कानून से संघर्षरत मसलन बाल तस्करी, बाल विवाह, बाल वैश्यावृत्ति, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति में शामिल बच्चे, किसी प्राकृतिक आपदा के शिकार, दिव्यांग, लापता या घर से भागे हुए, ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता या उनमें से कोई एक जेल में हैं वह भी इसके पात्र होंगे।

इसके साथ ही एचआइवी या एड्स से प्रभावित ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता आर्थिक, शारीरिक या मानसिक रूप से देखभाल के लिए असमर्थ हैं, सहायता और पुनर्वास की आवश्यकता वाले बच्चे, फुटपाथ पर जीवनयापन करने वाले, प्रताड़ित, उत्पीड़ित या शोषित बच्चे भी पात्रता की श्रेणी में होंगे माता-पिता की मृत्यु पर आय सीमा की बाध्यता नहीं है। आवेदक की पारिवारिक की आय ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार की अधिकतम आय 72 हजार रुपये वार्षिक और अन्य क्षेत्रों में अधिकतम आय 96 हजार रुपये वार्षिक होनी चाहिए. पुनर्वास स्पांसरशिप में माता-पिता दोनों अथवा वैध संरक्षक की मृत्यु होने पर परिवार की अधिकतम आय सीमा की जरूरत नहीं है।

आवेदन के लिए आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, अभिभावक का मृत्यु प्रमाण पत्र, शिक्षण संस्थान में पंजीयन के प्रमाण पत्र की जरूरत होगी. योजना के लिए बच्चों की आर्थिक मदद के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय सोनभद्र में आवेदन कराया जा सकता है। यह भी बताया की हम सभी को हर बच्चा मेरा बच्चा” के भाव के साथ समझनी होगी जिम्मेदारी।
चाईल्ड हेल्पलाइन यूनिट से परामर्शदाता अमन सोनकर एवं केस वर्कर बजरंग सिंह ने बताया की बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी, सम्बन्धित जानकारी प्राप्त होती है तो तत्काल चाईल्ड हेल्पलाइन टोल फ्री नम्बर 1098 पर सूचित किया जा सकता है। जिससे बच्चो को संरक्षण प्रदान कराया जा सके।

टीम मे जिला बाल संरक्षण इकाई से ओआरडब्ल्यू शेषमणि दुबे, चाईल्ड हेल्पलाइन यूनिट से केस वर्कर बजरंग सिंह, परामर्शदाता अमन सोनकर, सुपरवाइजर धर्मवीर सिंह, रविन्द्र सिंह, अनिल सिंह, सत्यम चौरसिया, अंशुगिरी आदि उपस्थित रहे।

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