वीरांगना महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर गोष्ठी का आयोजन

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अमित मिश्रा

वीरांगना महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर हुई गोष्ठी

0 सदर तहसील अंतर्गत दुरावल कला में आयोजित हुआ कार्यक्रम

सोनभद्र। अखिल भारतवर्षीय गोंड़ महासभा के कार्यकर्ताओं द्वारा सोमवार को वीरांगना महारानी दुर्गावती के 460 में बलिदान दिवस पर गौरव महासम्मेलन वीरांगना धाम दुरावल कला में आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि रामनिवास गौड़ संजय यादव पूर्व ब्लाक प्रमुख द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस दौरान अतिथि द्वारा संबोधित करते हुए बताया गया कि रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्तूबर 1524 को आज के बुलंदेलखंड के बांदा जिले में हुआ था। दुर्गा अष्टमी के दिन जन्म होने के नाते नाम रखा गया दुर्गावती। उन्होंने बचपन से ही घुड़सवारी, तीरंदाजी और तलवारबाजी जैसी युद्ध कलाओं को सीखना शुरू कर दिया था। आगे चलकर उन्होंने गोंडवाना पर लगभग 16 साल शासन किया।
वही सपा जिला उपाध्यक्ष डॉ लोकपति सिंह ने बताया कि कालिंजर के राजा कीरत सिंह की सुपुत्री और गोंड राजा दलपत शाह की पत्नी रानी दुर्गावती की वीरता से भला कौन परिचित नहीं होगा। देश की महान वीरांगना रानी दुर्गावती ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने हाथों से अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. मुगल शासक अकबर के सामने झुकने के बजाय उन्होंने खुद ही अपना खंजर अपने सीने में उतार लिया था. वह तारीख थी 24 जून 1565. उनकी शहादत को अब बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी अवसर पर आइए जान लेते हैं रानी दुर्गावती की वीरता की कहानी। इस मौके पर श्याम बिहारी यादव, रवि कुमार गॉड, रंजनी सिंह ,त्रिवेणी खरवार, वासुदेव , दरोगा सिंह मौर्य, आशीष खंबे ,राजेंद्र प्रसाद ,राजेश कुमार गोंड, रमाकांत, रंजनी सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे पूरे कार्यक्रम का संचालन कर रहे राजेश कुमार गुण द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

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