हर घर जल योजना पर सवाल, घसियाटोला में ग्रामीणों का प्रदर्शन

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सी एस पाण्डेय

O- एक दर्जन से अधिक घर आज भी पेयजल कनेक्शन से वंचित, जिलाधिकारी से लगाई गुहार

बभनी (सोनभद्र)। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना की जमीनी हकीकत सोनभद्र जनपद के बभनी क्षेत्र में सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम पंचायत बभनी के घसियाटोला सहित आसपास के कई गांवों में अब भी दर्जनों परिवारों को नल से जल नहीं मिल पाया है। इसी को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का सब्र टूट गया और उन्होंने प्रदर्शन कर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक वर्ष पूर्व प्रदर्शन के बाद घसियाटोला में योजना के तहत कनेक्शन देने का कार्य शुरू हुआ था। उस दौरान कई गरीब और आदिवासी परिवारों को नल कनेक्शन दे दिए गए, लेकिन अब भी एक दर्जन से अधिक घर योजना से बाहर हैं। स्थिति यह है कि कहीं पाइपलाइन अधूरी है, तो कहीं कनेक्शन ही नहीं दिया गया। असनहर–रेणुकूट मार्ग के किनारे बसे गांवों में भी यही हाल देखने को मिल रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कागजों में सभी घरों तक जल आपूर्ति दर्शा दी गई है, जबकि हकीकत में कई परिवार आज भी हैंडपंप और दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर हैं। जल मीनारों का ढांचा खड़ा कर दिया गया, लेकिन नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। इससे योजना की गुणवत्ता और कार्यदायी संस्था की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

घसियाटोला के दयाराम, देवनारायण, लालमणि, धरमजीत, जयप्रकाश, जय सिंह, रामू, महेंद्र, नेहरू, मदनलाल, लवकुश और राजकुमार सहित कई परिवारों के घरों में अब तक नल कनेक्शन नहीं पहुंचा है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही। सुनैना, सरिता, राधा, नेहा, चिंता देवी, रिंकी, रूपा और सोनी सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें बार-बार प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि योजना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन घरों को जानबूझकर या लापरवाही से छोड़ा गया है, वहां तत्काल कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए।

इस संबंध में हर घर नल जल योजना के अवर अभियंता जनार्दन यादव ने बताया कि कुछ घर ड्राइंग में शामिल नहीं हो पाए थे, जिस कारण कनेक्शन नहीं दिया जा सका। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही पाइपलाइन बिछाकर सभी शेष घरों में नल कनेक्शन दिए जाएंगे।

हालांकि, सवाल यह बना हुआ है कि जब योजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, तो फिर आदिवासी बहुल इलाकों में अब भी लोग पानी के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या घसियाटोला के ग्रामीणों को वास्तव में नल से जल मिल पाएगा या फिर उन्हें एक बार फिर सड़क पर उतरना पड़ेगा।

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