जीवन के भवसागर से मुक्ति की युक्ति गुरु ही बता सकता है,दूजा कोई नही

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अमित मिश्रा

सोनभद्र। वेद, पुराण, उपनिषद और हमारे धर्म ग्रंथो में गुरु को प्रथम पूज्य बताया गया है। बिना गुरु के इस भवसागर से मुक्ति की युक्ति कोई दूजा नही बता सकता, सृष्टि के आरम्भ से अब तक गुरु शिष्य परम्परा जीवंत और जागृत है। हमारे जीवन में गुरु उस प्रकाश पुंज की भांति हैं जो भीतर के अंधकार को मिटाकर आलोकित करते हैं। जिन्हें शिष्य के जीवन प्रेरणास्रोत और पथ प्रदर्शक बताया गया है जो ज्ञान और संस्कार देकर योग्य व्यक्तित्व का निर्माण करके राष्ट्र और समाज का निर्माण करते हैं।


जनपद के श्री शारदा माता भक्त मण्डल द्वारा मां शारदा के साधक ब्रम्हलीन प्रधान पुजारी मैहर धाम गुरुदेव सरकार देवी प्रसाद के अवतरण प्राकट्य दिवस के अवसर पर नगर स्थित श्री संकटमोचन रामजानकी मन्दिर परिसर में भक्तों द्वारा पूज्य गुरुदेव के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर संगीतमय गुरुदेव महिमा का पाठ व भजन कीर्तन के पश्चात प्रसाद वितरण व विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

जिसमें भक्तों द्वारा गुरु महिमा और पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित गीत भजन व स्तुति की संगीतमय प्रस्तुति की गयी। उक्त आयोजन में भक्त उल्लासित, उत्साहित व प्रसन्नचित्त मुद्रा में गुरु भक्ति में सराबोर होकर भक्ति भजन में गोते लगाते रहे।


उक्त अवसर पर राजेंद्र सिंह, कमलेश चौबे, डा. अनिल पाण्डेय, प्रभात सिंह चन्देल, आशीष पाठक, सुनील अग्रहरी, राजकुमार अग्रहरी, आशुतोष मिश्र, जगदीश अग्रहरी, सत्यप्रकाश चौबे, प्रतीक मिश्रा, भोजपुरी गायक रसिया राज आदि लोग मौजूद रहे।

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