नौगढ़ में 35 दिन से लापता युवक का नहीं लगा सुराग, परिजनों और ग्रामीणों ने सीओ कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

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चंदौली जिले के चकरघट्टा थाना क्षेत्र के गहिला गांव निवासी विरोधी नामक युवक के 35 दिनों से लापता होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। युवक का अब तक कोई सुराग नहीं लगने से परिजनों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। मंगलवार को लापता युवक की मां रामवती देवी सैकड़ों ग्रामीणों और महिलाओं के साथ नौगढ़ स्थित क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय पहुंचीं और मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की।

परिजनों का कहना है कि विरोधी 12 मई को सेमरा गांव में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने गया था, जिसके बाद से वह लापता है। युवक की तलाश में परिवार लगातार पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।

सीओ कार्यालय में हुई वार्ता के दौरान सोनभद्र के वरिष्ठ अधिवक्ता राम जियावन सिंह यादव और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामचंद्र यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में विजय बहादुर सिंह, रणविजय सिंह यादव, विमलेश यादव, प्रदीप कुमार, प्रधान प्रतिनिधि अजय उर्फ विक्की, लापता युवक की मां और पत्नी भी शामिल थीं।

अधिवक्ताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब युवक को कथित रूप से शादी समारोह से एक स्कॉर्पियो वाहन में बैठाकर ले जाने की जानकारी सामने आई थी, तब अपहरण का मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया। उनका आरोप है कि पुलिस ने केवल गुमशुदगी दर्ज कर मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

परिजनों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पुलिस को संभावित ठिकाने की जानकारी दी थी, जहां युवक को बंधक बनाकर रखे जाने की आशंका जताई गई थी। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इस पर अधिकारियों ने परिजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी।

वहीं ग्रामीणों का कहना है कि युवक के लापता होने के 35 दिन बाद भी कोई ठोस सुराग न मिलना कई सवाल खड़े करता है। क्षेत्र में यह मामला अब पुलिस की कार्यशैली और प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन गया है। ग्रामीणों ने युवक की जल्द बरामदगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष भी मौजूद थीं। रामवती, सुनीता, ललिता, मुनिया, रोशनी, सुकेशरी, दुर्गावती, असरफी, असरफी, लीलावती, छविराम, बुल्लू, राजमनी, उदयनाथ, इंद्रजीत, रामधारी, सुरेंद्र, मुन्ना, बाबूंदर, फकीर, पप्पू, कमल, हनुमान, बुद्धु सहित अन्य ग्रामीणों मौजूद रहे।

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