मोबाइल नंबर नहीं तो इलाज नहीं! नौगढ़ सीएचसी में ऑनलाइन पर्ची व्यवस्था से मरीज परेशान

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

चंदौली जिले के नौगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार द्वारा अस्पतालों में ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली लागू की गई है, लेकिन इसका खामियाजा अब वनांचल क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के अभाव में मरीजों की पर्ची नहीं बन रही है, जिससे दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने आने वाले लोगों को बिना उपचार वापस लौटना पड़ रहा है।

नौगढ़ सीएचसी पर एक लाख से अधिक आबादी निर्भर है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिनके पास न तो मोबाइल फोन है और न ही तकनीकी जानकारी। अस्पताल में ऑनलाइन पंजीकरण के लिए मोबाइल नंबर अनिवार्य बताए जाने से मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

तेंदुआ गांव की रहने वाली तनीबुर्की घुटनों के असहनीय दर्द से परेशान होकर करीब 15 किलोमीटर का सफर तय कर सीएचसी नौगढ़ पहुंचीं। उनका आरोप है कि मोबाइल नंबर न होने के कारण उनकी पर्ची नहीं बनाई गई। उन्होंने कर्मचारियों से कई बार दर्द का हवाला देते हुए पर्ची बनाने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। अंततः उन्हें बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा।

इसी तरह बोझ गांव की अमरावती एक्स-रे कराने के लिए लगभग 25 किलोमीटर दूर से अस्पताल पहुंचीं, लेकिन मोबाइल नंबर उपलब्ध न होने के कारण उनकी भी पर्ची नहीं बन सकी। अमरावती ने कहा कि वे गरीब परिवार से हैं और मोबाइल फोन खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। पर्ची न बनने से उनका एक्स-रे भी नहीं हो सका और उन्हें निराश होकर घर लौटना पड़ा।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में पर्ची बनाने वाले कर्मचारी आधार कार्ड और मोबाइल नंबर की मांग करते हैं। मोबाइल नंबर न होने पर मरीजों को पंजीकरण से वंचित कर दिया जाता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच प्रभावित हो रही है।

हालांकि इस मामले में सीएचसी नौगढ़ के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अवधेश पटेल का कहना है कि ऑनलाइन पर्ची काटना सरकार की योजना है। जिन मरीजों के पास आधार कार्ड या मोबाइल नंबर नहीं है, उन्हें भी थोड़ी देरी से ही सही, दवाइयां और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

फिर भी सवाल यह है कि क्या डिजिटल व्यवस्था के नाम पर गरीब और तकनीकी संसाधनों से वंचित लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर किया जा सकता है? वनांचल क्षेत्र के लोगों की यह पीड़ा अब व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़ी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1543
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?